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Chaitra Navratri का आज दूसरा दिन, विधि विधान से करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-आराधना

लखनऊ: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की शुरुआत बीते मंगलवार 13 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। आज बुधवार को नवरात्रि का दूसरा दिन है। चैत्र नवरात्रि के हर दिन मां दुर्गा के विभिन्न नौ रूपों में से एक रूप की आराधना की जाती है। आज बुधवार को चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जायेगी।

मां ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण किये हुए है, उनके दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। मां ब्रह्मचारिणी के नाम में ब्रह्म शब्द का अर्थ है– तपस्या, यानी तप का आचरण करने वाली। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को संदेश देती हैं कि परिश्रम से ही सफलता की प्राप्ति होती है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले जिन देवी-देवताओ को आपने कलश में आमंत्रित किया है। उन्हें पंचामृत स्नान दूध, दही, घृत, मेवे और शहद से स्नान कराएं। इसके बाद इन पर फूल, अक्षत, रोली, चंदन का भोग लगाएं। इसके बाद पान, सुपारी और कुछ दक्षिणा रखकर पंडित को दान करें। इसके बाद अपने हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करते हुए बार-बार मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी को सिर्फ लाल रंग का ही फूल चढ़ाए साथ ही कमल से बना हुआ ही माला पहनाएं। मां को चीनी का भोग लगाएं। ऐसा करने से मां जल्द ही प्रसन्न होती है। इसके बाद भगवान शिव जी की पूजा करें और फिर ब्रह्मा जी के नाम से जल, फूल, अक्षत आदि हाथ में लेकर “ऊं ब्रह्मणे नम:” कहते हुए इसे भूमि पर रखें।

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ब्रह्मचारिणी देवी का मंत्र

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय हाथों में एक लाल फूल लेकर देवी का ध्यान करें और हाथ जोड़ते हुए प्रार्थना करते हुए मंत्र का उच्चारण करें।

श्लोक

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु! देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा!!

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।

धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।

पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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