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Chamoli Rishiganga Tragedy Update: 21 वें दिन 72 लोगों के शव बरामद, 205 लोग गुमशुदा

चमोली पुलिस के मुताबिक अब तक कुल 72 शव और 30 मानव अंग बरामद हुए हैं जिनमें से 40 शवों और 1 मानव अंग की पहचान हो चुकी है

उत्तराखंड: उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली में जोशीमठ के पास तपोवन इलाके में 7 फरवरी को ग्लेशियर फटने से राज्य को अब तक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इलाकों में राहत एंव बचाव कार्य जारी हैं।

चमोली पुलिस के मुताबिक अब तक कुल 72 शव और 30 मानव अंग बरामद हुए हैं जिनमें से 40 शवों और 1 मानव अंग की पहचान हो चुकी है। जोशीमठ पुलिस स्टेशन में पंजीकृत 205 लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है।

टनल का मलबा

ग्लेशियर टूटने से रैणी पावर प्रोजेक्ट (Raini Power Project) पूरा बह गया और तपोवन (Tapovan ) भी क्षतिग्रस्त हुआ। पहले प्रोजेक्ट से 32 लोग लापता थे। टनल का मलबा बाहर निकाला जा रहा है।

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ग्लेशियल झील के बहने के कारण

2021 उत्तराखंड बाढ़ 7 फरवरी 2021 को उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल हिमालय में युनेस्को की विश्व धरोहर स्थल नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान से शुरू हुई। ऐसा माना जाता है कि यह भूस्खलन, हिमस्खलन या ग्लेशियल झील के बहने के कारण हुआ है। इसके कारण चमोली जिले में बाढ़ की स्थिति बन गई, विशेष रूप से ऋषिगंगा नदी, धौलीगंगा नदी, और अलकनंदा गंगा की प्रमुख नदीशीर्ष में इस आपदा में कम से कम 38 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है और लगभग 168 लोग लापता हैं।

चट्टान के मलबे

कुछ रिपोर्टो के अनुसार, नन्दा देवी ग्लेशियर से एक भारी और ठोस हिस्सा, प्राकृतिक कारणों से टूटकर नीचे के ग्‍लेशियर पर गिर गया। इससे ग्‍लेशियर के टुकड़े-टुकड़े हो गए और चट्टान के मलबे के साथ मिल गए। इसके बाद चट्टान और बर्फ का वो मिश्रण तेज ढलान से 3 किलेामीटर तक नीचे रौंथी गधेरा धारा से टकराया। जब वह नदी से टकराया तो एक बांध जैसा स्ट्रक्चर बन गया और बर्फबारी की वजह से कुछ समय तक टिका रहा। बाढ़ से तीन दिन पहले तक, मौसम साफ रहा। जिससे जमा चट्टान और बर्फ का मिश्रण तेजी से पिघला और उस इलाके को चीरता हुआ तपोवन घाटी की तरफ बढ़ गया।

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