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Chanakya Niti: बिजनेस में चाहिए सफलता तो इन चीजों में रखे संतुलित

चाणक्य नीती या चाणक्य नीतीशस्त्र (Chanakya Niti) चाणाक्य द्वारा रचित एक नीती ग्रंथ है। संस्कृत साहित में चाणक्य नीति का महत्वपूर्ण स्थान है।

लखनऊ: चाणक्य नीती या चाणक्य नीतीशस्त्र (Chanakya Niti) चाणाक्य द्वारा रचित एक नीती ग्रंथ है। संस्कृत साहित में चाणक्य नीति का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके मुख्य सूत्रों में सुखमय जीवन की शैली और सफल जीवन बनाने के लिए उपयोगी सुक्षाव दिये गए हैं। इस जीवन शैली में मुख्य रुप से धर्म, संस्कृति, न्याय, शंति और शिक्षित जीवन के लिए अच्छे और अनोखें विचार दिया है।

लोग चाणक्य के कई नीतीयां को फौलो कर के आज भी नौकरी या बिजनेस में सफलता का मार्ग आसान बनाते हैं। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे पहले खुद से तीन प्रश्न करने चाहिए। पहला प्रश्न कि मैं यह काम क्यों कर रहा हूं और दूसरा कि इसका परिणाम क्या होगा और तीसरा क्या मुझे इस काम में सफलता हासिल होगी? चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को जब इन तीन प्रश्नों के जवाब मिल जाए तभी अपना कार्य शुरू करना चाहिए।  चाणक्य के अनुसार स्त्री यानी पत्नी, मित्र और नौकरी में संतुलित व्यवहार रखना चाहिए।

अगर ऐसा आप नहीं रखते है तो आपके बिजनेस में अहित होना चिश्चय है। चाणक्य के अनुसार असभ्यता से बात करने वाली स्त्री से घर का नाश हो जाता है। मित्र के घटिया सोच कपटी आचरण से व्यक्ति हमेशा संदेह में रहता है और वह किसी से अपनी दिल की बात नहीं कह सकेगा। वैसे ही काम करने में अगर कोई मुहफट नौकर हो तो उसे तुरन्त निकालना चाहिए। क्योंकी वह आपके आत्मविश्वास को डगमगा देगा जो की आपको निर्णय लेने में प्रभावित करेगा। ऐसे लोगों के साथ रहना का मतलब खुद के घरों में सांप पालना है।

Chanakya Niti: रखें स्त्री, मित्र और नौकर में संतुलित व्यवहार

इस से आपको मृत्यु के बराबर कष्ट हो सकता है। इसलिए इन सभी में आपका अच्छा और संतुलित व्यवहार रखना चाहिए। आपको बता दें, चाणक्य कहते है जिस राजा के पास अच्छा सलाह देने वाला मंत्री नही होता वह बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। ठीक उसी तरह अगर घर में अच्छा मीठे वचन के साथ अच्छे विचार देने वाली पत्नी भी होनी उतना ही आवश्यक है। इसके बाद आपसी सलाह के लिए विश्वसनीय मित्र भी होना चाहिए।

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वह मित्र आपका इतना विश्वासनिय होना चाहिए की आप बिना झिझक अपनी बात उसे कह सके। वह मित्र उसका कोई गलत फायदा नही उठाए। वैसे ही उसे नौकर भी आज्ञाकारी और मालिक को समझने वाला नौकर चाहिए ताकि वह सुख पूर्वक रह सके। उनका कहना है कि व्यक्ति को अगर ऐसा वातावरण न मिले तो उसका जीवन सर्प के साथ रहने समान है। उस बुद्धिमान व्यक्ति को धूर्त मनुष्यों से सदा सतर्क रहना चाहिए।

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