ब्रह्मोस को LAC तक ले जाने के लिए चार धाम सड़क को चौड़ा करने की जरूरत

नई दिल्ली: केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उत्तराखंड के चार धाम क्षेत्र में ब्रह्मोस जैसे महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों को भारत-चीन सीमा के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तक पहुंचाने के लिए चौड़ी सड़कों की आवश्यकता है।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच एनजीओ सिटीजन फॉर ग्रीन दून द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें स्टेज- I वन और वन्यजीव मंजूरी को चुनौती दी गई है। यह मंजूरी पेड़ों को काटकर फीडर सड़कों के सुधार और विस्तार के लिए दी गई थी।

“सेना को ब्रह्मोस ले जाना है … एक बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होगी। अगर इसके परिणामस्वरूप भूस्खलन होता है, तो सेना इससे निपटेगी। अगर सड़कें पर्याप्त चौड़ी नहीं हैं तो हम कैसे जाएंगे?” केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत में दलीलें रखीं।

अपने तर्क में केके वेणुगोपाल ने कहा कि देश को खुद का बचाव करने की जरूरत है क्योंकि यह कमजोर है। इसके लिए पर्यावरणीय आपदाओं के डर के बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को सड़कें उपलब्ध करानी होंगी। दो दिन पहले मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने पूछा था कि क्या वह पर्यावरण के आधार पर रक्षा जरूरतों को खत्म कर सकती है।

“हम इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते हैं कि इतनी ऊंचाई पर, राष्ट्र की सुरक्षा दांव पर है। क्या सर्वोच्च संवैधानिक अदालत कह सकती है कि हम विशेष रूप से हाल की घटनाओं के सामने रक्षा जरूरतों को खत्म कर देंगे? क्या हम कह सकते हैं कि पर्यावरण पर विजय होगी राष्ट्र की रक्षा? या हम कहते हैं कि रक्षा संबंधी चिंताओं का ध्यान रखा जाए ताकि पर्यावरण का क्षरण न हो?” बेंच ने कहा था।

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