Chardham Yatra 2021: इस साल नहीं होगी चारधाम यात्रा, केवल पुजारी करेंगे पूजा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह ऐलान किया कि प्रदेश में कोविड मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए चारधाम की यात्रा को स्थगित किया जाता है

देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह ऐलान किया कि प्रदेश में कोविड मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए चारधाम की यात्रा (Chardham Yatra) को स्थगित किया जाता है। केवल पुजारी ही वहां पूजा कर सकते हैं। पूरे देश के लोगों के लिए चारधाम यात्रा को अभी के लिए बंद किया जाता है। चारधाम यात्रा इस साल 14 मई 2021 से शुरू होने वाली थी।

हिमालय पर्वतों में विराजमान

हिमालय पर्वतों में स्थित चार धाम (Chardham ) पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल मंडल में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में स्थित है और इस परिपथ के चार धाम हैं-

  1. बद्रीनाथ (Badrinath)
  2. केदारनाथ (Kedarnath)
  3. गंगोत्री (Gangotri)
  4. यमुनोत्री (Yamunotri)

1- बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ (Badrinath) या बद्रीनारायण मंदिर उत्तराखण्ड (Uttarakhand) राज्य के चमोली जनपद में अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित एक मंदिर है। यह हिंदू देवता ‘विष्णु’ को समर्पित मंदिर है और यह स्थान इस धर्म में वर्णित सर्वाधिक पवित्र स्थानों, चार धामों, में से एक यह एक प्राचीन मंदिर है। जिसका निर्माण 7वीं-9वीं सदी में होने के प्रमाण मिलते हैं। मंदिर के नाम पर ही इसके इर्द-गिर्द बसे नगर को भी बद्रीनाथ ही कहा जाता है।

2- केदारनाथ धाम

केदारनाथ (Kedarnath) मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग (Rudraprayag) जिले में स्थित है। हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहां की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मंदिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्‍य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया है।

3- गंगोत्री धाम

गंगोत्री (Gangotri) गंगा नदी का उद्गम स्थान है। यह स्थान Uttarakhand के जिले उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है। गंगा मैया के मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18 वी शताब्दी के शुरूआत में किया गया था। वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था। हर साल मई से अक्टूबर के महीनों के बीच पतित पावनी गंगा मैंया के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते है। यमुनोत्री की ही तरह गंगोत्री का पतित पावन मंदिर भी अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खुलता है और दीपावली के दिन मंदिर के कपाट बंद होते है।

4- यमुनोत्री धाम

चार धामों में से एक धाम यमुनोत्री (Yamunotri) उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की पश्चिम दिशा में उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। यमुना पावन नदी का स्रोत कालिंदी पर्वत है। तीर्थ स्थल से एक कि. मी. दूर यह स्थल 4421 मी. ऊंचाई पर स्थित है। दुर्गम चढ़ाई होने के कारण श्रद्धालू इस उद्गम स्थल को देखने से वंचित रह जाते हैं। यमुनोत्री का मुख्य मंदिर यमुना देवी को समर्पित है। पानी के मुख्य स्रोतों में से एक सूर्यकुण्ड है जो गरम पानी का स्रोत है।

यह भी पढ़ेIPL 2021: जीत की पटरी पर लौटने की कोशिश करेगी MI, राजस्थान के लिए होगी कितनी बड़ी चुनौती

Related Articles