#HBDayAtal : लोगों को मिलेंगे ढेर सारे तोहफे

vajpayee225 दिसम्बर 2015 को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 91बें जन्म दिन है। जिंदादिल, हाजिर जवाब अटलजी इन दिनों सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर दिल्ली स्थित अपने आवास पर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं एक लम्बे अर्से से न तो वह स्वयं बाहर आए न ही उनका कोई चित्र ही बाहर आया है। बावजूद इसके लोगों के दिलों में उसी तरह से हैं जैसे वह प्रधानमंत्री रहते हुए या फिर विपक्ष में रहते हुए थे। उनके इस जन्म दिन को यादगार बनाने के लिए सब तरफ उत्साह का माहौल है। जिसमें जनता को भी कुछ तोहफे मिलने जा रहे हैं अटलजी के सम्मान में।
agr-train-1_1450860054आगरा-इटावा डीएमयू पैसेंजर ट्रेन की सौगात

वाजपेयी के जन्‍मदिन से एक दिन पहले गुरुवार से उनके गांव बटेश्‍वर से चार किलोमीटर दूर ट्रेन चलेगी। केंद्रीय रेल राज्‍य मंत्री मनोज सिन्‍हा हरी झंडी दिखाकर आगरा-इटावा डीएमयू पैसेंजर गाड़ी को रवाना करेंगे। इस परियोजना का शिलान्‍यास 1999 में वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्र‍ित्‍व काल में किया था। शिलान्‍यास के 16 साल बाद यह परियोजना पूरी हुई है। रेलवे ने बटेश्‍वर को रेलवे हॉल्‍ट बनाया है। इसका नाम बटेसर रखा गया है। यह नाम मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्‍वर’ से लिया गया है। आगरा रेल मंडल की पीआरओ भूपिंदर ढिल्‍लन का कहना है कि इस गांव का पुराना नाम बटेसर है और गांव के लोग इसी नाम से बोलते हैं। इसलिए रेलवे ने हॉल्‍ट का नाम बटेसर किया है। ट्रेन संचालन को हरी झंडी दिखाने के लिए बटेसर हॉल्‍ट पर मंच बनाया गया है। पंडाल तैयार किया जा रहा है। रेलवे हॉल्‍ट को पीले रंग में रंगा गया है।

खत्म होगी आवागमन की समस्या

बटेसर हॉल्‍ट, अटल बिहारी वाजपेयी के गांव बटेश्‍वर से चार किलोमीटर दूर बिजकौली में है। हालांकि गांव के लोग चाह रहे हैं कि इस हॉल्‍ट को स्‍टेशन का रूप दिया जाए। ताकि चंबल के बीहड़ में पर्यटन के लिए लगातार ट्रेनों का संचालन हो सके। चंबल के बीहड़ में ट्रेन चलने से बटेश्‍वर, शमसाबाद, फतेहाबाद, उदी, भांडई, जैतपुर कलां आदि इलाके के लोगों के लिए आवागमन की समस्‍या खत्‍म हो जाएगी।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था कि उनके गांव तक ट्रेन दौड़े। इसके लिए उन्‍होंने साल 1999 में योजना का शिलान्‍यास किया था। इसके बाद सरकार बदल गई, तो योजना भी खटाई में पड़ गई। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद इसमें तेजी आई। एक साल पहले इस ट्रैक पर मालगाड़ी का संचालन शुरू हुआ था।

यात्री ट्रेनों का शुभारंभ

वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को उनके ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-बाह-इटावा रेल मार्ग पर यात्री ट्रेनों का शुभारंभ करके तोहफा देने की तैयारी है। इस रेलमार्ग पर मालगाड़ी तो चार माह पूर्व से दौड़ रही है। अब यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू कराने के लिए मुख्य संरक्षा आयुक्त से अनुमति मिल गई है। इसी ट्रैक से जुड़ी भिड-इटावा रेल सेवा में अभी यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं किया गया है। इस ट्रैक पर चंबल पुल के एक पिलर पर जैकेटिग का कार्य अंतिम दौर में है।

chandigarh-new-delhi-shatabdi-660x330सोनीपत में रुकेगी चंडीगढ़-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर 25 दिसंबर को सोनीपत के लोगों के लिए चंडीगढ़-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पहली बार रेलवे स्टेशन पर रुकेगी और उत्तर रेलवे के डीआरएम अरुण अरोड़ा के साथ सांसद रमेश कौशिक सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह शहर के लोगों के लिए अटल जी के जन्मदिन पर एक तोहफा होगा। सांसद कौशिक ने 30 नवंबर को रेल मंत्री से मिलकर और पत्र सौंपकर ट्रेन का ठहराव सोनीपत स्टेशन पर करने की मांग की थी। मंत्री ने भी इस मांग को पूरा करते हुए शहर के लोगों को यह तोहफा दे दिया और अब 25 दिसंबर से प्रतिदिन यह ट्रेन सोनीपत रेलवे स्टेशन पर रुकनी शुरू हो जाएगी। सांसद ने कहा कि इस ट्रेन के ठहराव के बाद अब रेलवे स्टेशन पर कुछ दूसरी ट्रेनों के ठहराव के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।

gomti-nagar-railway-statiलेकिन अधूरा ही रहा लखनऊ का ड्रीम प्रोजेक्ट

वाजपेयी का जन्मदिन बीजेपी सुशासन दिवस के रूप में मनाने की तैयारी में है। लेकिन लखनऊ में अटल का एक ड्रीम प्रोजेक्ट अब भी अधूरा है। दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी गोमतीनगर रेलवे स्टेशन को मिनी चारबाग की तरह डेवलप करना चाहते थे। तत्कालीन पीएम ने गोमतीनगर रेलवे स्टेशन को डेवलप करने की योजना बनाई थी। इसके लिए अधिकारियों ने काफी होमवर्क किया था। बजट भी आवंटित हुआ। लेकिन एनडीए की सत्ता जाने के साथ ही स्टेशन के विकास की गति रुक गई। अब फिर एनडीए सत्ता में है, लेकिन गोमतीनगर स्टेशन पर डेवलपमेंट की शुरुआत नहीं हुई है।

13 साल बाद मिला स्टेशन का दर्जा
टर्मिनस का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन राज्यपाल विष्णु कांत शास्त्री, केंद्रीय रेल मंत्री नीतीश कुमार, सीएम मायावती और आवास नगर विकास उन्मूलन मंत्री लालजी टंडन की उपस्थिति में 21 मई 2000 को किया गया। इसके बाद इसका प्रयोग हॉल्ट के रूप में किया जाने लगा। इसके बाद करीब 13 साल बाद 18 दिसंबर को गोमतीनगर को रेलवे स्टेशन का दर्जा मिला।

96 करोड़ हुए थे आवंटित
पीएम वाजपेयी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 2003 में एक हाई लेवल टीम ने दो दिवसीय दौरा किया था। इस कमेटी में रेलवे बोर्ड के सदस्य, रेलवे सेफ्टी कमिश्नर और रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन इकाई के जीएम शामिल थे। टीम ने गोमतीनगर को सेकेंड रेलवे टर्मिनस बनाने की संभावना तलाशी थी। इसके लिए 96 करोड़ रुपए भी आवंटित कर दिए गए थे।

 

 

 

 

 

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