Chaudhary Charan Singh की 34वीं पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन की रोचक बातें, जेल में रहकर लिखे Book

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 34वीं पुण्यतिथि पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उन्हें श्रद्धांजलि दी है

लखनऊ: किसानों के मसीहा, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) की 34वीं पुण्यतिथि पर देश उन्हें नमन कर रहा है। इस मौके पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ (Lucknow) में उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

चौधरी चरण सिंह किसानों के नेता माने जाते रहे हैं। उनके द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था। एक जुलाई 1952 को यूपी में उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को अधिकार मिला। उन्होंने लेखापाल के पद का सृजन भी किया।

यूपी के मुख्यमंत्री

किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया। वो 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री बने। 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। मध्यावधि चुनाव में उन्होंने अच्छी सफलता मिली और दुबारा 17 फरवरी 1970 को वे मुख्यमंत्री बने। उसके बाद वो केन्द्र सरकार में गृहमंत्री (Home Minister) बने तो उन्होंने मंडल और अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की।

Chaudhary Charan Singh Biography in Hindi | चौधरी चरण सिंह जीवन परिचय |  StarsUnfolded - हिंदी

 

लाहौर अधिवेशन

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को एक जाट परिवार मे हुआ था। स्वाधीनता के समय उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने बरेली कि जेल से दो डायरी रूपी किताब भी लिखी। स्वतंत्रता के बाद वह ‘राम मनोहर लोहिया’ (Ram Manohar Lohia) के ग्रामीण सुधार आंदोलन में लग गए। आगरा विश्वविद्यालय से चौधरी चरण सिंह ने कानून की शिक्षा लेकर 1928 में वे ईमानदारी, साफगोई और कर्तव्यनिष्ठा पूर्वक गाजियाबाद में वकालत प्रारम्भ की। कांग्रेस के लाहौर (Lahore) अधिवेशन 1929 में पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया।

नमक कानून

1930 में महात्मा गांधी द्वारा नमक कानून तोड़ने का आह्वान किया गया। गांधी जी ने ‘डांडी मार्च’ (Dandi March) किया। आजादी के दीवाने चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया। परिणामस्वरूप चरण सिंह को 6 माह की सजा हुई। जेल से वापसी के बाद चरण सिंह ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वयं को पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित कर दिया। 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी चरण सिंह गिरफतार हुए फिर अक्टूबर 1941 में मुक्त किये गये। सारे देश में इस समय असंतोष व्याप्त था। महात्मा गांधी ने करो या मरो का आह्वान किया।

अंग्रेजों में भारत छोड़ों की आवाज सारे भारत में गूंजने लगी। 9 अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति के माहौल में युवक चरण सिंह ने भूमिगत होकर गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मवाना, सरथना, बुलंदशहर के गांवों में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया। मेरठ कमिश्नरी में युवक चरण सिंह ने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर ब्रितानिया हुकूमत को बार-बार चुनौती दी। मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था। एक तरफ पुलिस चरण सिंह की टोह लेती थी वहीं दूसरी तरफ युवक चरण सिंह जनता के बीच सभायें करके निकल जाते थे। आखिरकार पुलिस ने एक दिन चरण सिंह को गिरफतार कर ही लिया। राजबन्दी के रूप में डेढ़ वर्ष की सजा हुई। जेल में ही चौधरी चरण सिंह की लिखित पुस्तक ‘शिष्टाचार’ भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज है।

भारत के 5वें प्रधानमंत्री

चौधरी चरण सिंह 1979 में वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना की। 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह समाजवादी पार्टियों तथा कांग्रेस के सहयोग से प्रधानमंत्री बने। वह भारत के किसान राजनेता एवं 5वें प्रधानमंत्री थे। उन्होंने यह पद 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक संभाला  29 मई 1987 में उनकी मृत्यु हो गई।

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