‘जब नाम भेजा नहीं तो वीरेन्द्र सिंह बन कैसे गए लोकायुक्त’

0

download (2)इलाहाबाद। यूपी के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चन्द्रचूड़ ने लोकायुक्त की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस चन्द्रचूड़ का कहना है कि उन्होंने लोकायुक्त के लिए जिन 5 नामों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी उसमें वीरेन्द्र सिंह का नाम नहीं था। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर वीरेन्द्र सिंह के नाम पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर कैसे लगाई।

ये भी पढें- सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जस्टिस वीरेंद्र सिंह होंगे यूपी के लोकायुक्त

यूपी में लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी लंबे समय से नए लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की जा रही थी। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लोकायुक्त का नाम तय करने के लिए तीन दिन का समय दिया था। वक्त बीतने के बाद भी जब राज्य सरकार नाम तय नहीं कर पाई तो सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जस्टिस वीरेन्द्र सिंह के नाम पर अपनी मोहर लगा दी। देश के इतिहास में ये पहला मौका था जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी राज्य में लोकायुक्त के नाम का ऐलान किया। कोर्ट के इस फैसले से यूपी की अखिलेश यादव सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

ये भी पढ़ें- दिल्ली की नई लोकायुक्त बनीं #रेवा_क्षेत्रपाल

अब यूपी के मुख्य न्यायाधीश ने इस फैसले पर सवाल खड़े करके एक और मश्किल खड़ी कर दी है।  मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चन्द्रचूड़ का साफ कहना है कि जो लिस्ट उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को दी थी उसमें जस्टिस वीरेन्द्र सिंह का नाम नहीं था।

loading...
शेयर करें