ढोल की धुन पर थिरके मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel, बोले- जय जोहार संगवारी हो, देखें Video

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों विशेषकर आदिवासी समाज को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं

रायपुर: विश्व आदिवासी दिवस (World Tribal Day) के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) रायपुर (Raipur) में सीएम आवास पर आयोजित एक समारोह में हिस्सा लिया है। इस दौरान उन्होंने बड़े उत्साह के साथ ढोल बजाते हुए आदिवासी गीत पर थिरके। सीएम भूपेश बघेल ने इस असवर पर सभी प्रदेशवासियों विशेषकर आदिवासी समाज को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा ‘जय जोहार संगवारी हो’, हमारी प्राथमिकता, हमारा प्रयास आदिवासी समाज का बहुमुखी विकास।

उन्होंने कहा कि जनजातियों की प्राचीन कला और संस्कृति छत्तीसगढ़ की अनमोल धरोहर है। राज्य सरकार उनकी प्राचीनतम परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों को सहेजते हुए उनके विकास के लिए लगातार प्रयासरत है।

आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित

सीएम भूपेश बघेल ने कहा प्रदेश में पहली बार ‘राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव’ (National Tribal Festival) का आयोजन राजधानी रायपुर में किया गया। देवगुड़ी और घोटुल के विकास और सौंदर्यीकरण की पहल की जा रही है। इससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है। हमारी कोशिश है कि आदिवासी समुदाय तक सीधे सरकार की विकास योजनाएं पहुंचे और जल, जंगल और जमीन को लेकर उनकी चिंता दूर हो सके। आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देने के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं। हमने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश घोषित किया हैै।

आदिवासी समाज की बेहतरी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा यहां की करीब 31 प्रतिशत आदिवासी जनता और शेष आबादी के बीच की दूरी को कम करते हुए उन्हें मुख्य धारा से जोड़कर आगे बढ़ाने के लिए नए रास्ते खोले गए हैं। जनजातियों के विकास और हित को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने बीते ढाई साल में कई अहम फैसले लिये हैं। 52 वनोपजों की समर्थन मूल्य में खरीदी, आदिवासी क्षेत्रों में नई प्रशासनिक इकाईयों का गठन, नई सड़कें, हाट बाजारों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने जैसे कई प्रयास आदिवासी समाज की बेहतरी के लिए किए गए हैं।

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जमीन का अधिकार

भूपेश बघेल ने कहा मुझे खुशी है कि हमने तेजी से आदिवासियों के हितों के लिए निर्णय लिए जिससे उनका जीवन अधिक सरल हो सका है। हमने वन अधिकार पट्टों के माध्यम से हजारों आदिवासियों को जमीन का अधिकार देकर उन्हें आवास, और आजीविका की चिंता से मुक्त करने का प्रयास किया है। हमारी कोशिश है कि आदिवासी समुदाय तक सीधे सरकार की विकास योजनाएं पहुंचे और जल, जंगल और जमीन को लेकर उनकी चिंता दूर हो सके।

उन्होंने कहा आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देने के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं। हमने छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस (Tribal Day) पर सामान्य अवकाश घोषित किया हैं। सीएम ने कहा कि प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का आयोजन राजधानी रायपुर में किया गया। देवगुड़ी और घोटुल के विकास और सौंदर्यीकरण की पहल की जा रही है। इससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है।

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