ठंड में भी नंगे पांव और टूटी चप्पल में स्कूल आने को मजबूर बच्चे, जानें क्या है वजह

खातों में पैसे भेजे गए

योगी सरकार ने सर्दी से बचने के लिए स्कूली बच्चों को जूते के पैसे खाते में दिए. इसके बाद भी प्राथमिक स्कूलों के बच्चे नंगे पांव और टूटी चप्पल में स्कूल आने को मजबूर हैं. बता दें बच्चों के स्कूल ड्रेस, स्वेटर और जूतों के लिए सरकार ने माता-पिता के एकाउंट में 1100 रुपए भेजे हैं. लेकिन, इनमें से कई बच्चों के अभिभावकों के खाते से रुपए कट गए. किसी का जीरो बैलेंस के कारण बैंक ने रुपए काट लिए तो किसी के पिता की लोन किस्त के कारण रुपए कट गए. बच्चे ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं.

अभिभावकों के खाते में सरकार ने भेजे पैसे

उत्तर प्रदेश शासन ने इस वर्ष बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को जूते, मोजे, यूनिफार्म देने के लए पैसा सीधे अभिभावकों के खाते में दिया. यूनिफार्म के पैसे की पहली किस्त जारी भी हो चुकी है. पैसा आने के बाद भी बच्चे नंगे पांव स्कूल आ रहे हैं. जब शिक्षकों ने इसका पता लगाया तो पता चला कि बच्चों की यूनिफार्म का पैसा अभिभावकों के बैंक खाते के बकाया लोन की किस्त में कट गया। वहीं, कई अभिभावकों ने पैसा निकाला और खर्च कर दिया है, इसके अलावा जीरो बैलेंस के कारण कई लोगों के खाते से बैंक ने रुपए काट लिए.

एक जोड़ी जूते तीन भाई-बहन कर रहे गुजारा

पचपेड़ा गांव के प्राथमकि स्कूल में पढ़ने वाले नवनीत, रश्मि और अनुज तीनों भाई बहनों में केवल रश्मि को ही जूते मिले हैं. रश्मि कहती हैं कि ठंड लगती है, इसलिए छोटा भाई मेरे जूते पहन लेता है. रश्मि टूटी चप्पल में स्कूल आती हैं और बड़ा भाई नवनीत कई बार नंगे पांव स्कूल आता है. इसी तरह दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली नुपूर के पास न यूनिफार्म, न स्वेटर और न ही जूते हैं. नुपूर कहती हैं कि दूसरे बच्चों को जूते पहनकर देखती हूं तो खराब लगता है. पैरों में ठंड भी लगती है.

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