नेपाल में भारत से ज्यादा हो गया चीन का निवेश 

नेपाल के नए संविधान के खिलाफ चले मधेसी आंदोलन के दौरान सीमा पर नाकेबंदी हुई तो नेपाल के लोगों ने पेट्रोल के लिए चीन का रुख किया
नेपाल के नए संविधान के खिलाफ चले मधेसी आंदोलन के दौरान सीमा पर नाकेबंदी हुई तो नेपाल के लोगों ने पेट्रोल के लिए चीन से मदद ली। (फाइल फोटो)

काठमांडू। भारत से नेपाल की बढ़ती दूरी का फायदा चीन ने अपने खजाने का मुंह खोलकर भी उठाया। चीन ये पहले से ही चाहता रहा है कि नेपाल में उसकी दखलंदाजी बढ़े। इस बार मिले मौके को उसने पूरी तरह कैश किया।

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चीन ने नेपाल के चुनाव आयोग को करीब 15 करोड़ नेपाली रुपए की तकनीकी मदद देने का ऐलान किया है। चीन ने चुनाव आयोग को मदद के अलावा नेपाल के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग के तीन समझौते किए। चीन, नेपाल में राष्ट्रीय सशस्त्र प्रहरी बल के लिए प्रशिक्षण संस्थान खोलने में भी सहयोग कर रहा है।

इस प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना काठमांडू में की जाएगी। इसके लिए चीन 3 अरब 60लाख नेपाली रुपए देगा। इसके अलावा चीन ने नेपाल में चुनाव सामग्री के लिए लगभग15 करोड़ 41 लाख नेपाली रुपए का सहयोग दिया है।

बढ़ता निवेश

सरकारी आँकड़ों को देखें तो पता चलता है कि चीन अब नेपाल की बड़ी परियोजनाओं में भी निवेश बढ़ाने की गंभीर कोशिश कर रहा है।

नेपाल के उद्योग विभाग के महानिदेशक ध्रुब राजबंशी के मुताबिक, “अभी तक भारत से चीन में काफ़ी निवेश होता रहा है पर अब परियोजनाओं की संख्या के हिसाब से चीन दूसरे नंबर पर आ गया है। भविष्य में चीन हाइड्रो पावर में भी निवेश करना चाहता है। अगर ऐसा हुआ तो नेपाल में उसका निवेश काफी हो जाएगा।”

बीते साल नेपाल में आए भूंकप के दौरान चीन ने नेपाल की खासी मदद की।
बीते साल नेपाल में आए भूंकप के दौरान चीन ने नेपाल की खासी मदद की।

आम तौर पर चीन ने नेपाल में रेस्त्राँ आदि में निवेश किया है। पर पहली बार अब वो हाइड्रो पावर क्षेत्र में आने की कोशिश कर रहा है। वो पश्चिम सेती में 1।6 अरब डॉलर यानी 86 अरब 40 लाख रुपए की लागत से 750 मेगावॉट की विद्युत परियोजना में निवेश करने को तैयार है।

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इसके अलावा अपर तामकोशी में 650 मेगावॉट की हाइड्रो पावर परियोजना के निर्माण का ठेका चीन की एक कंपनी को मिला है, हालाँकि इसमें पैसा नेपाल सरकार और नेपाली उद्योगपतियों का लगा है।

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक नेपाल में भारत 525 परियोजनाओं में शामिल है और कुल प्रस्तावित सीधे विदेशी निवेश में उसकी 46 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जबकि चीन 478परियोजनाओं में शामिल है। पर प्रस्तावित सीधे विदेशी निवेश में उसका हिस्सा सिर्फ़ दस प्रतिशत है।

इस साल निवेश के आँकड़े कहीं ज़्यादा दिलचस्प हैं। नेपाली साल जुलाई में खत्म होगा पर अब तक भारत के निवेश जहाँ 4515 करोड़ रुपए का है, वहीं चीन का निवेश 6130करोड़ तक पहुँच गया है।

जानकार मानते हैं कि चीन की नेपाल में बढ़ती दिलचस्पी थोड़े वक़्त के लिए नहीं है बल्कि वो अगले 25-30 साल की योजना के तहत ये काम कर रहा है।

सांस्‍कृतिक साझेदारी

चीनी भाषा के कई इंस्टीट्यूट नेपाल के कई हिस्सों में चल रहे हैं। यही नहीं चीन की सरकार ने नेपाल के लोगों को मुफ़्त में चीनी भाषा सिखाने के लिए बाक़ायदा अध्यापकों को चीन से काठमांडू भेजा है।

काठमांडू विश्वविद्यालय के कनफ़्यूशियस इंस्टीट्यूट और अंतरराष्ट्रीय भाषा संस्थान में चीनी भाषा और संस्कृति के बारे में सिखाने की व्यवस्था की गई है।

दशकों तक भारत के आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभामंडल में रहने के बाद अब नेपाल बाँहे फैलाकर हिमालय पार के अपने पड़ोसी देश चीन का स्वागत करने को तैयार है।

आने वाले वर्षों में नेपाल में अपनी भूमिका बढ़ने की संभावना को पहचानते हुए चीन ने भी हर क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है।

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