पानी को हथियार बनाने की जद्दोजहद में जुटा चीन, भारत सहित इन देशों पर मंडरा सकता है जल संकट

नई दिल्लीः भारत-चीन सीमा पर कई महीनों से चल रही सैनिक झड़पों को विराम दे कर चीन एक तरफ सुलह की नुमाइश कर रहा है तो दूसरी तरफ सुंरग के रास्ते नदियों का पानी मोड़ने की कोशिश में लगा हुआ है।

दरअसल तिब्बत से निकलने वाली सिंधू नदी और ब्रह्मापुत्र के पानी को चीन सुरंग के रास्ते शिंजियांग प्रांत से जोड़ने की तैयारी में है। साल 2017 से ही यून्नान में सुंरग का निर्माण कर इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है। 600 किलोमीटर इस सुरंग परियोजना में चीन 11.7 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट की माने तो इस सुरंग के निर्माण से चीन तकलामकान नामक रेगिस्तान क्षेत्र को पानी मुहैया कराएगा। वहीं चीन की हरकत के चलते भारत, पाकिस्तान और बांगलादेश पर जलसंकट का खतरा मंडरा सकता है।

गौरतलब है कि सिंधू नदी तिब्बत से निकल कर लद्दाख और पाकिस्तान के रास्ते अरब सागर में मिलती है, तो वहीं ब्रह्मापुत्र नदी भी तिब्बत से अरूणाचल और असम के रास्ते बांगलादेश में गंगा नदी से मिल जाती है।

सिंधू और ब्रह्मापुत्र दुनिया की बड़ी नदियों में से एक हैं, जिनके ऊपर खासी आबादी निर्भर करती है। जहां सिंधू को पाकिस्तान की जीवन रेखा कहा जाता है, तो वहीं ब्रह्मापुत्रा पूर्वी भारत और बांग्लादेश की लाइफलाइन मानी जाती है। ऐसे में चीन की इस परियाजना के चलते करोड़ो लोगों का जीवन संकट में आ सकता है।

आपको बता दें कि चीन ने इससे पहले से ही बह्मपुत्र की सहायक नदी शिआबूकू की धारा को रोक दिया है,वहीं भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच चीन ने सिंधू नदी की सहायक गलवान नदी पर भी रोक लगा दी है।

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