कंपनियों के भारत जाने की बात सुनकर बौखलाया चीन, कहा कभी भी नहीं बन सकता चीन का विकल्प

नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी  की वजह से चीन से बहुत सी कंपनियां निकलने की योजना बना रही हैं. पिछले दिनों एक खबर आई थी कि चीन (China) से करीब 1 हजार कंपनियां अपना कारोबार समेटकर भारत में अपना कामकाज शुरू करना चाहती हैं. बता दें कि मोबाइल उपकरण बनाने वाली घरेलू कंपनी लावा इंटरनेशनल (Lava International) ने कहा है कि वह चीन (China) से अपना कारोबार समेट कर भारत ला रही है.

अगले पांच साल में भारत में लावा इंटरनेशनल की 800 करोड़ रुपये निवेश की योजना
भारत में हाल में किये गये नीतिगत बदलावों के बाद लावा ने यह कदम उठाने का फैसला किया है. लावा ने अपने मोबाइल फोन (Mobile Phone) विकास और विनिर्माण परिचालन को बढ़ाने के लिये अगले पांच साल के दौरान 800 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है. बता दें कि जर्मनी की एक जूता कंपनी भी चीन से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को हटाकर आगरा में शिफ्ट करने की योजना बना रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई अन्य कंपनियों ने भी चीन से अपना कारोबार शिफ्ट करके भारत में शुरू करने की योजना बनाई है.

चीन ने पश्चिमी मीडिया को दलाल की संज्ञा दी
चीन में ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में चीन की बौखलाहट साफतौर पर दिख रही है. लेख में इस बात का जिक्र किया गया है कि लॉकडाउन की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है इसके बावजूद कंपनियां चीन को छोड़कर भारत में अपना ठिकाना बनाने का सपना देख रही हैं. हालांकि लेख में स्पष्टतौर पर लिखा है कि भारत कभी चीन का विकल्प नहीं बन सकता है. इन शब्दों को देखकर चीन की बौखलाहट का अंदाजा लगाया जा सकता है. चीन ने इस लेख के जरिए पश्चिमी मीडिया को दलाल तक की संज्ञा दे दी है.

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