चीनी इन्वेस्टमेंट और विदेशी सर्वर को लेकर PayTm संसदीय कमेटी के कटघरे में

कमिटी ने उनसे यह भी कहा कि जिस सर्वर में ग्राहकों के आंकड़े हैं, उसे भारत में ही रखा जाना चाहिए।

नई दिल्ली: भारतीय संसद की एक कमेटी ने को डिजिटल पेमेंट एप PayTm के प्रतिनिधियों से कंपनी में चीनी कंपनियों के इन्वेस्टमेंट के बारे में गुरूवार को बैक टू बैक सवाल पूछे। कमिटी ने उनसे यह भी कहा कि जिस सर्वर में ग्राहकों के आंकड़े हैं, उसे भारत में ही रखा जाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि PayTm के शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत सूचनाओं के संरक्षण विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति के सामने पेश हुए और प्रस्तावित कानून को लेकर आंकड़ों के प्रबंधन समेत महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपने सुझाव दिए।

भारतीय संसद में मौजूद विभिन्न दलों के सदस्यों वाली सेलेक्ट कमेटी ने PayTm से यह पूछा कि जिस सर्वर में ग्राहकों के आंकड़े रखे गए, वह विदेश में क्यों है, जबकि कंपनी भारतीय होने का दावा करती है। मिली जानकारी के अनुसार कमेटी के सदस्यों ने पेटीएम के प्रतिनिधियों से कहा कि ग्राहकों के आंकड़े वाले सर्वर को भारत में रखा जाना चाहिए। कमेटी के सदस्यों ने काम्पनी से यह भी जानना चाहा कि डिजिटल भुगतान सेवा में चीनी इन्वेस्टमेंट कितना है।

PayTm स्वयं के उत्पाद भी बेच रही

चूंकि PayTm अपने e-commerce प्लेटफार्म पर स्वयं के उत्पाद भी बेच रही है, इसको देखते हुए हितों के टकराव की संभावना के बारे में सवाल पूछे गए। PayTm ने समिति के सामने कहा कि संवेदनशील और व्यक्तिगत आंकड़े प्रसंस्करण (विश्लेषण) को लेकर भारत के बाहर स्थानांतरित किये जा सकते हैं। लेकिन ऐसा आंकड़े से जुड़े व्यक्ति की जरूरी मंजूरी के बाद ही हो सकता है।

ऑनलाइन वाहन बुकिंग कंपनियों से भी होगी पूछताछ

बता दें की इससे पहले संसदीय कमेटी के समक्ष फेसबुक, ट्विटर और अमेजन अपनी बातें रख चुकी हैं। जबकि दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो और एयरटेल और ऑनलाइन वाहन बुकिंग सेवा देने वाली ओला और उबर से कमेटी के समक्ष पेश होने को कहा गया है। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता वाली समिति व्यक्तिगत आंकड़ा सुरक्षा विधेयक 2019 पर विचार कर रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद ने 11 दिसंबर, 2019 को व्यक्तिगत सूचना संरक्षण विधेयक लोकसभा में पेश किया था। विधेयक में लोगों से जुड़ी उनकी निजी जानकारी के संरक्षण और आंकड़ा संरक्षण प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक को बाद में विचार के लिए संसद के दोनों सदनों की जॉइंट सिलेक्शन कमेटी को भेज दिया गया। प्रस्तावित कानून किसी व्यक्ति की सहमति के बिना संस्थाओं द्वारा व्यक्तिगत आंकड़ों के भंडारण और उपयोग पर रोक लगाता है।

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