चर्च ने कहा- योगा से नहीं आता किसी शख्स में कोई बदलाव, ईसाईयों से की दूर रहने की अपील

तिरुवंतपुरम: केंद्र सरकार द्वारा की जा रही योग को बढ़ावा देने की कवायद को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, एक तरफ जहां केंद्र सरकार योग को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ केरल की एक चर्च ने केंद्र सरकार की इस कोशिश को तगड़ा झटका दिया है। दरअसल, चर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह भगवान के पास पहुंचने का साधन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ईसाई सम्प्रदाय के लोगों से योगा से दूर रहने की अपील की है।

मिली जानकारी के अनुसार, सायरो-मालाबार चर्च के सैद्धांतिक आयोग के पाली बिशप जोसेफ कल्लारगट्टू एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट को हाल ही में सायरो मालाबार चर्च की धर्मसभा की तरफ से मंजूरी भी मिल गई है। हालांकि पादरियों और समाज के सदस्यों के एक समूह ने इस रिपोर्ट का विरोध किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि योगा भगवान तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। यह विश्वास करना सही नहीं है कि यह भगवान को महसूस करने या उससे साक्षात्कार करने में मददगार होता है। योगा किसी शख्स के अंदर किसी तरह का कोई बदलाव नहीं लाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरएसएस और दूसरे संघ परिवार समूह पूरे भारत में योग को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए समाज के सदस्यों को इस अभ्यास के बारे में अधिक सावधानी बरती रहनी चाहिए।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि समाज के सदस्य और चर्च प्रमुखों को योग पर ध्यान देने और दूसरे आध्यात्मिक आंदोलनों से बचना चाहिए। यह कैथोलिक मान्यता के बिलकुल खिलाफ है। योगा और दूसरे एंटी-क्रिश्चियन प्रथाएं चर्च के आधिकारिक शिक्षाओं को प्रोत्साहित नहीं करती हैं।

चर्च का कहना है कि बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाने के लिए काफी सारे क्रिश्चियन योगा सेशन के लिए जा रहे हैं लेकिन यह प्रथाएं एंटी क्रिश्चियन विचारों और संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। किसी भी समझदार व्यक्ति को ऐसी प्रथाओं को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।

आपको बता दें कि हमारी संस्कृति में योगा का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक शारीरिक व्यायाम के रूप में या फिर ध्यान केंद्रित करने या ध्यान करने के लिए आसन के रूप में माना जाता है।

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