अयोध्या पर सुनवाई को लेकर CJI का बड़ा बयान, कहा- ऐसा फैसला देंगे जिसकी हमसे उम्मीद है

उच्चतम न्यायालय में जन्मभूमि विवाद पर गुरुवार को 36वें दिन की सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पांच जजों की पीठ ने रामजन्मस्थान पुनरोद्धार समिति को नया तथ्य रखने से रोक दिया। भरोसा रखिए, हम ऐसा फैसला देंगे जिसे हमें देने की जरूरत है।

पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ऐसे दस्तावेज पेश कर रहे थे, जो उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में नहीं रखे थे। पीठ को महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला देना है। लिहाजा उसे इन दस्तावेजों को भी देखना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘यह किसने कहा कि हम संविधान पीठ हैं? क्या इसको नियमानुसार सवाल रेफर किया गया है?  यह पांच जजों की पीठ है, जो उच्च न्यायालय से आई पहली अपील पर सुनवाई कर रही है। हम संविधान पीठ नहीं हैं।’

मंदिर के साक्ष्य संदेह से परे : रामलला विराजमान की ओर से अधिवक्ता वैद्यनाथन ने कहा, अयोध्या में ध्वस्त की गई बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल संरचना की मौजूदगी के साक्ष्य संदेह से परे हैं। खुदाई से निकले अवशेषों से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वहां मंदिर था। वैद्यनाथन ने कहा कि पहले मुस्लिम पक्षकारों का दावा था कि वहां कोई संरचना ही नहीं थी। बाद में उन्होंने कहा कि यह इस्लामिक ढांचा या ईदगाह की एक दीवार थी। हम कहते हैं कि वह मंदिर था, जिसे ध्वस्त किया गया और खुदाई के दौरान मिले स्तंभों के आधार इसकी पुष्टि करते हैं। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से अधिवक्ता धवन ने इस पर आपत्ति जताई। डीवाई चंद्रचूड ने वैद्यनाथन से कहा कि आप विश्वास नहीं, सबूतों के आधार पर बताइए कि यह राम मंदिर ही था।

स्कंद पुराण में हर हिंदू को अयोध्या जाने का निर्देश
वैद्यनाथन के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने कहा कि स्कंद पुराण में अयोध्या का पूरा जिक्र है। उसके अध्याय ‘अयोध्या महात्म्य’ में हर हिंदू को अयोध्या जाने के निर्देश हैं। ये पुराण मस्जिद के बनने से सात सदी पूर्व आठवीं सदी का है।

अखाड़े  ने माफी मांगी
निर्मोही अखाड़े के वकील ने अपनी उस टिप्पणी पर माफी मांगी कि उच्चतम न्यायालय 20:20 मैच करवा रहा है। गोगोई ने उन्हें लताड़ते हुए कहा, “ये क्या टिप्पणी है? इस पर अखाड़े के वकील ने कहा कि मैं माफी चाहता हूं।”

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