73वें हिमाचल दिवस समारोह में CM जयराम ठाकुर ने सैनिकों को दी श्रदांजलि

हिमाचल प्रदेश के जिले मंडी में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 73वें हिमाचल दिवस समारोह में शामिल हुए

शिमला: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)  के जिले मंडी में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 73वें हिमाचल दिवस समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा, मैं उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं जिन्होंने हिमाचल की अलग पहचान के लिए बहूमूल्य योगदान दिया। मैं सैनिकों को श्रदांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।

देव भूमि

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) को “देव भूमि” भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में आर्यों का प्रभाव ऋग्वेद से भी पुराना है। आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद, यह ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के हाथ में आ गया। सन 1857 तक यह महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य का हिस्सा था। सन 1956 में इसे केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया, लेकिन 1971 में इसे, हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-1971 के अन्तर्गत इसे 25 जनवरी 1971 को भारत का 18वां राज्य बनाया गया।

बारहमासी नदियों की बहुतायत के कारण, हिमाचल अन्य राज्यों को पनबिजली बेचता है जिनमें प्रमुख हैं दिल्ली, पंजाब और राजस्थान। राज्य की अर्थव्यवस्था तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है जो हैं, पनबिजली, पर्यटन और कृषि। हिंदु राज्य की जनसंख्या का 95% हैं और प्रमुख समुदायों में राजपूत, ब्राह्मण, घिर्थ (चौधरी), गद्दी, कन्नेत, राठी और कोली शामिल हैं। ट्रान्सपरेन्सी इंटरनैशनल के 2005 के सर्वेक्षण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश में केरल के बाद दूसरी सबसे कम भ्रष्ट राज्य है।

हिमाचल प्रदेश का इतिहास

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि मानव अस्तित्व का अपना इतिहास है। इस बात की सत्यता के प्रमाण हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में हुई खुदाई में प्राप्त सामग्रियों से मिलते हैं। प्राचीनकाल में इस प्रदेश के आदि निवासी दास, दस्यु और निषाद के नाम से जाने जाते थे। उन्नीसवीं शताब्दी में रणजीत सिंह ने इस क्षेत्र के अनेक भागों को अपने राज्य में मिला लिया। जब अंग्रेज यहां आए, तो उन्होंने गोरखा लोगों को पराजित करके कुछ राजाओं की रियासतों को अपने साम्राज्य में मिला लिया।

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