IPL
IPL

होली से पहले रंगो में रंगी काशी, भव्य अंदाज में मनाई रंगभरी एकादशी, देखें अद्भुत नजारा

वाराणसी: फाल्गुन माह की पूर्णिमा होली के पांच दिन पहले कशी (Kashi) में विशेष होली उत्स्व होता है। काशी की लोक परंपरा के अनुसार इस साल भी रंगभरी एकादशी बुधवार को ब्रह्म मुहूर्त में बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के गौना के मुख्य अनुष्ठान शुरू किया गया। सुबह चार बजे बाबा भोले का रुद्राभिषेक 11 वैदिक ब्राह्मणों ने विधि विधान से किया। अनुष्‍ठानों का दौर शुरू होते ही बाबा के दरबार में हरहर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। कशी (Kashi) के लोगों को बाबा की पालकी देखने का इंतजार था जो शाम होते ही निकली तो काशी विश्‍वनाथ गली हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठी।

लोकाचार और बाबा का श्रृंगार सुबह सात बजे किया गया। महंत परिवार की महिलाएं गाने गाते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार पहुंचीं और महादेव की आंखों में मंदिर के खप्पड़ से काजल लगाया। गौरा के माथे पर सजाने के लिए सिंदूर परंपरानुसार अन्नपूर्णा मंदिर के मुख्य विग्रह से लाया गया। शिव-पार्वती के विग्रह को महंत आवास के भूतल स्थित हाल में विराजमान करके भोग लगाया। महंत ने विधि विधान से वेद मंत्रों के साथ महाआरती की।

ये भी पढ़ें : बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए अभिभावकों का शिक्षित होना जरूरी: महापौर

अबीर गुलाल से हुई होली

दोपहर में आयोजन की तैयारियां शुरू हुईं तो आस्‍थावानों के कदम भी उधर ही बढ़ चले। अबीर और गुलाल हाथ में लिए शिवभक्‍त बाबा के इंतजार में पलक पावड़े बिछाए नजर आए। भगवन शिव जी के गीतों के साथ शाम 4:30 बजे तक कार्यक्रम चला, इसके बाद बाबा की पालकी यात्रा निकली जो मंदिर परिसर तक गई। इसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और अबीर गुलाल से होली होने लगी। बाबा के भाल पहला गुलाल सजाकर काशीवासी होली हुड़दंग की अनुमति पाकर निहाल हुए। शिव परिवार को मंदिर गर्भगृह में विराजमान करा कर लोकाचार निभाया गया। मंदिर प्रशासन की ओर से इस खास मौके पर संगीतमय शिवार्चन किया गया।

ये भी पढ़ें : पकौड़े बेचने से तो बेहतर है यह बिज़नेस ,GOVERNMENT भी करेगी इसमें मदद

इस तरह निभाई रस्म

बीते 21 मार्च को बाबा के गौना महोत्सव की शुरूआत गीतों के साथ की गई थी। 22 मार्च को गौरा के तेल-हल्दी की रस्म निभाई गई। वहीं बाबा विश्वनाथ 23 मार्च को ससुराल यानी टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास आए। शाम के समय 11 वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रों से आराधना कर उन्हें रजत सिंहासन पर विराजमान किया। रंगभरी ठंडई चढ़ाई गई। परंपराओं के मुताबिक आयोजन शुरू हुआ तो काशी में हर हर महादेव का उद्घोष गूंज उठा।

 

 

Related Articles

Back to top button