25, 26 को केवडिया में होगा विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन

संविधान दिवस के मौके पर नर्मदा के तट पर गुजरात के केवडिया में देश के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंड करेंगे और उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु भी उपस्थित रहेंगे।

नई दिल्ली: संविधान दिवस के मौके पर नर्मदा के तट पर गुजरात के केवडिया में देश के विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंड करेंगे और उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु भी उपस्थित रहेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन 25 और 26 नवंबर को केवडिया में आयोजित किया जायेगा जहां नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के निकट दुनिया की सबसे ऊंची लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थापित की गयी है।

बिरला ने कहा कि राष्ट्रपति कोविंद 25 नवंबर को सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 नवंबर को सम्मेलन के समापन सत्र को वीडियो लिंक द्वारा संबोधित करेंगे। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति नायडू, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी एवं अन्य गणमान्य विशिष्टजन भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि कोविड काल में यह पहला बड़ा कार्यक्रम होगा जिसमें राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति प्रत्यक्ष उपस्थित होंगे।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष के सम्मेलन का विषय ‘सशक्त लोकतंत्र हेतु विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का आदर्श समन्वय’ रखा गया है। सम्मेलन में विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी लोकतंत्र के तीन स्तंभों के बीच बेहतर सहयोग और समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह हमारे संवैधानिक दायित्वों का ही हिस्सा है। हमारी संवैधानिक व्यवस्था में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र और उनके बीच संतुलन रखने हेतु प्रावधान स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। संवैधानिक संतुलन बनाये रखना हमारा सामूहिक दायित्व है तथा शासन प्रणाली के तीनों अंगों के बीच सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखने और देश में लोकतंत्र के विकास के लिए यह आवश्यक भी है।

सम्मेलन में 26 नवम्बर को संविधान दिवस

बिरला ने बताया कि सम्मेलन में 26 नवम्बर को संविधान दिवस के अवसर पर सभी प्रतिनिधि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के संविधान में दी गई प्रस्तावना को पढ़ेंगे। समापन समारोह में एक संकल्प भी पारित किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान संविधान दिवस पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

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देहरादून में आयोजित किये गये इसी सम्मेलन में शून्य काल

उन्होंने कहा कि गत वर्ष उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित किये गये इसी सम्मेलन में शून्य काल और अन्य संसदीय साधनों के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने, क्षमता निर्माण और संविधान की दसवीं अनुसूची तथा पीठासीन अधिकारियों की भूमिका से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई थी और तीन समितियों का गठन किया गया था। केवडिया में उन तीनों समितियों की रिपोर्टों पर भी विचार किया जाएगा।

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अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की शुरुआत

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की शुरुआत सन 1921 में हुई थी और तब से ही इस सम्मेलन के माध्यम से लोकतान्त्रिक प्रणाली को मजबूत करने तथा भारत के विधानमंडलों में एकता और अखंडता की भावना को बढ़ावा देने के अनवरत प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वर्ष इस सम्मेलन का शताब्दी वर्ष है। 14-15 सितंबर 2020 से 14-15 सितंबर 2021 को शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

 

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