“मान गये मुग़ल-ए-आज़म, आप-कांग्रेस के गठबंधन में डूबा राजनीतिक आलम…”

नई दिल्ली: प्रचलित आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन के मसले पर अब सहमती मिलती दिख रही है. दिल्ली के अंदर उपराज्यपाल चुनी हुई सरकार का नॉमिनी होगा जब तक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नही मिलेगा. अब दोनों पार्टियों में सीटों पर बातचीत और बहस  शुरू होगी.

सूत्रों के मुताबिक़ कांग्रेस ने दिल्ली में गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) को आख़िरी फ़ॉर्मूला दिया है. नए फ़ॉर्मूले के मुताबिक़ कांग्रेस (Congress) ने दिल्ली में 3 सीटें मांगी हैं. साथ ही हरियाणा में आम आदमी पार्टी को 1 सीट और पंजाब में कोई सीट नहीं देने का ऑफ़र रखा है. अगर आम आदमी पार्टी को ये फ़ॉर्मूला मंजूर होता है तो गठबंधन होगा नहीं तो कांग्रेस सातों सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करेगी. वहीं आम आदमी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक़ कांग्रेस से अभी कोई औपचारिक संदेश नहीं आया है. आम आदमी पार्टी दिल्ली में 6 सीटों पर अड़ी है.

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उधर, ‘आप’ सांसद संजय सिंह ने कहा कि गठबंधन पर कांग्रेस ने अभी तक कोई आधिकारिक चर्चा शुरू नहीं की. जो भी फॉर्मूला आ रहा है वह टीवी में और मीडिया में दे रहे हैं. हमको कोई फॉर्मूला नहीं मिला है. जो भी फॉर्मूला आ रहा है वह TV में और मीडिया में दे रहे हैं. हमको कोई फॉर्मूला नहीं या कोई औपचारिक प्रस्ताव कांग्रेस की तरफ़ से नहीं मिला है. कांग्रेस को जो प्रस्ताव शरद पवार के ज़रिए भिजवाया था उसपर भी कोई जवाब नहीं आया है. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जो विशाखापटनम में बोला वो राहुल गांधी से पहली बैठक के बारे में है. जिसमें कुछ नया नहीं क्योंकि, राहुल गांधी से उसके बाद कोई मीटिंग नहीं हुई है.

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