ये वो वाले यादवजी नहीं हैं

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Akhilesh_Yadav

हमारे भ्रष्टाचार की जांच हमारा आदमी करेगा। दरअसल ये वो अवधारणा है जिसके गाल पर आज तमाचा पड़ा है। और ये थप्पड़ किसी और ने नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने मारा है।

वीरेन्द्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त तो बन गए लेकिन वो वो वाले यादव नहीं है जिनको सरकार चलाने वाले यादवजी पसंद करते हैं। दरअसल सरकार चलाने वाले यादवजी की पसंद वो वाले यादवजी (जस्टिस रवीन्द्र सिंह) थे जो राज्यपाल को पसंद नहीं थे। उन्होंने तो फाइल भी लौटा दी थी। यादवजी और मौर्याजी जब सरकारी भ्रष्टाचार दूर भगाने के लिए बैठकी करने बैठे थे। तब हाईकोर्ट के सबसे बड़े न्यायमूर्ति यानि चीफ जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ नहीं पहुंचे थे। यादवजी और मौर्याजी की ये बैठकी बेकार गई थी। यादवजी अपने यादवजी को लाना चाहते थे और मौर्याजी बहनजी के खासमखास मिश्राजी (सतीश मिश्रा) के किसी लंगोटिया यार से भ्रष्टाचार की जांच करवाना चाहते थे। सबने मिलकर एक नियुक्ति में इतना रायता फैला दिया कि इस मामले को नज़दीक से जानने और समझने वाले सब पर थूकने लगे।

कहानी केवल इतनी नहीं है। इस कहानी में और भी ड्रामा है या कहे कि पूरी ड्रामेबाजी है। सरकार चलाने वाले यादवजी ने एक दांव और खेला। इसमें उनको पूरा साथ मौर्याजी का मिला। ये वही मौर्याजी हैं जिनको सरकार का हर कदम नागवार गुजरता है। लेकिन लोकायुक्त संशोधन बिल लाने में मौर्याजी यादवजी के हमसफर बन गए। दोनों मिलकर अपनी ताकतों से विधानसभा में बिल भी पास कराकर ले आए। इस बिल में लोकायुक्त तैनात करने के अधिकार यादवजी और मौर्याजी ने अपने अपने हिसाब से आपसे में बांट लिए। और करीने से चीफ जस्टिस को किनारे लगा दिया। लेकिन मामला फंस गया राजभवन में जहां राज्यपाल ने कानून बनने से पहले ही इस बिल पर साइन करने के मना कर दिया। यही नहीं राज्यपाल ने कहा कि ये लोकतंत्र के साथ मजाक है।

इसी टालमटोल और थूका-थाकी की खबर जब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची तो सरकार चलाने वाले यादवजी को जमकर फटकारा गया। इतना ही नहीं उनको तीन दिन का अल्टीमेटम भी दे दिया। सुप्रीम कोर्ट से फटकार खाना सरकारों के लिए नई और बड़ी बात नहीं है। ये भी एक खबर बनी। लेकिन इसका असर केवल इतना हुआ कि यादवजी और मौर्याजी की एक और बैठकी हो गई। इसमें भी चीफ जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ नहीं पहुंचे। वन टू वन दोनों ने भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बात की लेकिन पिछली बारों की तरह इस बार भी हुआ कुछ नहीं। यादवजी मेरा वाला और मौर्याजी बहनजी वाला करते रहे। आखिर अल्टीमेटम की मियाद पूरी हुई और एक झटके में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी को नया लोकायुक्त दे दिया।

जस्टिस वीरेन्द्र सिंह यादव अब यूपी के लोकायुक्त होंगे। वो जस्टिस एनके मेहरोत्रा की जगह लेंगे जो यादवजी और मौर्याजी की लड़ाई में लंबे समय से एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन पाकर नौकरी खींच रहे थे। यूपी में सरकार चलाने वाले यादवजी और मौर्याजी जैसे लोग भले ही यूपी के गांव-गांव तक बिजली और सड़क न पहुंचा पाए हो लेकिन उन्होंने ये संदेश जरूर पहुंचा दिया है कि तुम यादव हो और तुम दलित।

श्रीपति त्रिवेदी का ब्‍लॉग

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