AIIMS की स्टडी में खुलासा, ‘कोरोना बदल रहा अपना स्वरुप, नहीं कारगर वैक्सीन’

नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल में कोरोना पर हो रही रिसर्च में एक चौकाने वाली बात सामने आई है। ख़बरों के अनुसार रिसर्च में कोरोना वायरस अपना स्वरुप लगातार परिवर्तित कर रहा है, जिस कारण अभी तक इसकी कोई सटीक वैक्सीन नहीं बन पायी है। इस बात का खुलाया AIIMS भोपाल के डायरेक्टर प्रो. सरमन सिंह के निर्देशन में काम कर रही टीम की रिसर्च स्टडी में हुआ है।

दुनियाभर के औषधिविद् इस खोज में हैं की जल्द कोई वैक्सीन बने जिससे इस महामारी को दुनिया से खत्म किया जा सके। लेकिन अभी तक की सारी कोशिशों पर कोई भी ठोस सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ पाया है। इसका मुख्य कारण कोरोना का बदलता स्वरुप भी हो सकता है। यही कारन है की औषधिविद् इसके स्वरुप बदलने से सकते में हैं और कोई ठोस वैक्सीन न बन पाने की बात कर रहे।

एम्स भोपाल के अलावा दुनिया भर की रिसर्च में भी ये बात सामने आई है कि चीन से निकला कोरोना का स्वरुप डी 614जी था। उसके बाद से अभी तक कोरोना वायरस ने अपने स्वरुप को 83 बार बदला है।

AIIMS की रिसर्च में सामने आए कई फैक्ट्स

AIIMS भोपाल के डायरेक्टर प्रो. सरमन सिंह ने भी कहा है की इस मामले में म्स भोपाल की टीम ने भी स्टडी की है। जिसके बाद उन्होंने कहा की ये कहना मुश्किल होगा की कोई भी वैक्सीन कोरोना के बदले स्वरुप पर प्रभावी होगी।

वैक्सीन बनने से पहले ही बदल जाता है वायरस का स्वरुप

कोरोना वायरस पर रिसर्च और इसकी वैक्सीन निर्माण के दौरान इसपर शोध करने वालों ने पाया कि अमेरिका में सबसे ज्यादा लगभग 60 बार कोरोना वायरस ने अपने स्वरुप को बदला। मलेशिया में 8 बार, भारत में लगभग 5 बार इसने अपने स्वरुप को बदला है। शोधकर्ताओं का मनना है की जब-जब वैक्सीन अपने अंतिम चरण में होती है वायरस अपना स्वरुप बदल लेता है। वहीँ इसकी स्वरुप बदलने की गति तीन गुनी तेज़ है।

जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए ये ये बात सामने आई है कि कोरोना वायरस के रूप परिवर्तन के बाद प्लाज्मा थैरेपी भी कारगर सिद्ध नहीं हो पाती। अब तो ये भी नहीं कहा जा सकता की जो भी वैक्सीन बनेगी वो कोरोना के बदले स्वरुप पर कारगर होगी भी या नहीं। वहीँ वायरस के रूप का परिवर्तन इंसान के शरीर में एंटीबॉडी भी नहीं बनने दे रहा है।

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