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राजनीति जरुरी है या लोगो की जान, चुनाव जरुरी है या इंसान

लखनऊ: मंदिर बंद, मस्जिद बंद, स्कूल बंद कालेज भी बंद पर चुनाव जारी है। खैर देश के विकास के लिए चुनाव होना भी आवश्यक है। फिर ये चुनाव कोविड नियम-कानूनों के तहत हो भी रहे है। चुनावो के लिए पोलिंग बूथों को ख़ास तरीके से व्यवस्थित किया गया है। अगर पोलिंग बूथों पर इतनी व्यवस्था की गई है तो इसका मतलब है कि वहां कोरोना (Corona) फ़ैलने का डर बहुत ज्यादा है। पर एक बात मेरी समझ से परे है कि चुनावी रैलियों में तो इतनी भारी-भरकम भीड़ होती है फिर वहां से कोरोना अपना मुँह छिपाकर कैसे निकला जा रहा है।

अगर मेरी बातें आपको आहत कर रही हो तो कृपया मुझे माफ़ कर दीजिएगा। क्योंकि इसमें मेरी कोई गलती नही है। मै तो सिर्फ वही बोल रहा हूँ जो मुझे हर तरफ दिखाई पड़ रहा है। और ये सब देखने के बाद मेरे छोटे से मष्तिस्क में कुछ सवाल कौंधने लगते है। उन सवालो की अगर लिस्ट बनाऊं तो शायद पूरा पन्ना भर जाये।

क्या चुनाव बन सकता है किसी की जान का दुश्मन

मै बस कुछ बातों को सोच सोच कर परेशान हूँ कि राजनीति जरुरी है या लोगो की जान, चुनाव जरुरी है या इंसान। मै ये नहीं कहता कि मेरे दिमाग में चल आपसी गुफ्तगूं सही है, शायद मै गलत भी हो सकता हूँ। क्योकि अगर चुनाव नहीं होंगे तो कुर्सी के हकदार कैसे चुने जायेंगे, और अगर कुर्सी पर बैठने वाले ही नहीं होंगे तो लोगो की जान के साथ राजनीति भी कौन करेगा।

अब आते मेरे दिमाग में चल रही उन बातों पर क्योकि मेरे मस्तिष्क अगर कोई बात आई है तो उसका कोई कारण होगा। मै बस ये बात सोच कर हैरान-परेशान हूँ कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी और टीएमसी की चुनावी रैलियों से आखिर कोरोना (Corona) इतना कैसे डर सकता है। क्योंकि अगर ये बीमारी है तो सबको एक बराबर होगी। या फिर चुनावी रैलियों के लिए राजनीतिक दलों ने कोरोना (Corona) से कोई सांठ-गांठ कर रखी है।

ये कोरोना (Corona) है या उलझन

मेरी उलझन का अंत बस यही नहीं हुआ। अब मेरा दिमाग़ पश्चिम बंगाल के अलावा उन चार राज्यों में भी पहुंच गया जहाँ विधानसभा चुनाव चल रहे है। इन पांचों राज्यों से कोरोना (Corona) फ़ैलने की खबरें एकदम न के बराबर आ रही है। खैर छोड़ो शायद मै ही ज्यादा सोच रहा हूँ, शायद वहां कोरोना (Corona) सच में न फ़ैल रहा हो, या फिर वहां कोरोना (Corona) फ़ैलाने वाले वायरस के कर्मचारी कुछ दिनों के अवकाश पर गए हो।

मैं अपने शब्दों से किसी को इस बात के लिए प्रोत्साहित नहीं करता कि लोग चुनावी रैलियों में उमड़ी भीड़ तरह कहीं भी एकत्रित हो जाएँ। अगर आप खुद को और अपने परिवार को समय से पहले परियों और हूरों के दर्शन नहीं कराना चाहते तो कृपा कर ज्यादा से ज्यादा समय घर पर ही बिताये। भीड़ में जाने से बचें और अगर मजबूरन जाना पड़े तो मास्क लगाकर ही जाएँ। इससे दो फायदे होंगे, एक तो आप कोरोना (Corona) से बचेंगे दूसरा आपकी ज़ेब पर महंगाई का असर भी कम पड़ेगा। धन्यवाद

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