पंजाब, हरियाणा में कपास का रकबा पिछले साल से ज्यादा रहने की संभावना

नई दिल्ली। हरियाणा में इस साल नकदी फसल कपास और गóो की बिजाई में किसानों ने काफी दिलचस्पी दिखाई है। कपास का रकबा लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है तो गóो का रकबा लक्ष्य से ज्यादा हो चुका है। उत्तर भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हरियाणा में कपास का रकबा चालू बिजाई सीजन में पिछले साल से ज्यादा हो गया है। इस हफ्ते प्रदेश के कृषि विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में किसानों ने 6.41 लाख हेक्टेयर में कपास की बिजाई की है जबकि पिछले साल की बिजाई सीजन की समान अवधि में कपास का रकबा 6.15 लाख हेक्टेयर था।

हरियाणा सरकार ने इस साल कपास की बिजाई के लिए 6.48 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है जिसका 98.86 फीसदी पूरा कर लिया गया है और अभी बिजाई चल रही है। ऐसे में लक्ष्य से ज्यादा कपास की खेती होने की पूरी संभावना दिख रही है। हरियाणा में पिछले कुछ वर्षो में कपास का औसत रकबा 6.14 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि किसानों के लिए इस साल कपास लाभकारी फसल साबित हुई है क्योंकि इसका बाजार भाव सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ज्यादा रहा है। केंद्र सरकार ने पिछले साल 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में कपास का एमएसपी मीडियम स्टेपल के लिए 4020 रुपये प्रति क्विंटल और लांग स्टेपल के लिए 4320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।

कपास के अलावा गóो का रकबा भी हरियाण में इस साल लक्ष्य से ज्यादा हो चुका है। प्रदेश में गóो की खेती के लिए 1.17 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था जबकि किसानों ने 1.30 लाख हेक्टेयर में गóो की खेती की है, जोकि लक्ष्य का 111.02 फीसदी है। पिछले साल की समान अवधि में हरियाणा में 0.83 लाख हेक्टेयर में गन्न की फसल लगाई गई थी। केंद्र सरकार ने का लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी पेराई सत्र 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए 255 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था जबकि हरियाणा सरकार ने इस पर एसएपी की घोषणा किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा का दाम दिलाया।

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