भारत और चीन के बीच अगली भिड़ंत क्या कश्मीर पर हो सकती है

भारत और चीन के बीच तनाव अभी शांत नहीं हुआ है.इधर एक्सपर्ट अभी से चेताने लगे हैं कि अब कश्मीर भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने वाला है. इसकी वजह पाक-अधिकृत कश्मीर होगा. बता दें कि यहां पर चीन ने अरबों डॉलर का निवेश किया हुआ है. कश्मीर में चीन की मदद से चल रहे निर्माण पर भारत पहले से ही आपत्ति जताता रहा. अब चीन की नीतियों के चलते ये मामला जोर पकड़ सकता है. ऐसे में दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच भिड़ंत बढ़ी तो मामला काफी आगे निकल सकता है.पाक अधिकृत कश्‍मीर (PoK) में पाकिस्तान एक बड़ा बांध बना रहा है. इस प्रोजेक्ट को डायमर-भाषा डैम नाम दिया गया है. पाक पिछले कई दशकों से बांध बनाने की सोच रहा था लेकिन भारत के विरोध के कारण कोई दूसरा देश उसे फाइनेंस नहीं कर रहा था. अब चीन के सहयोग से उसे ये मुमकिन लग रहा है. चीन ने इसमें खरबों रुपये लगाए हैं और दोनों मिलकर इसे 2028 तक पूरा करना चाहते हैं. अब सवाल ये है कि दो देशों के करार से भारत को क्या आपत्ति है? तो मसला ये है कि यह प्रोजेक्ट उस गिलगित-बाल्टिस्‍तान में बनाने की बात है, जहां भारत अपना दावा रखता है. भारत को आपत्ति है कि विवादित और जबरन कब्जाए क्षेत्र में ऐसा कोई निर्माण अवैध होगा.

क्या है बांध की खासियत

अनुमानित तौर पर ये बांध 15 बिलियन डॉलर का है, जो तैयार होने के बाद दुनिया के सबसे बड़े बांधों में से एक हो सकता है. यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो बांध बनाने के काम में चीन के पावर चाइना और फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गेनाइजेशन के बीच करार हुआ है. और लगभग 4,500 मेगावाट के इस प्रोजेक्ट में चीन ने 70 प्रतिशत से ज्यादा पैसे लगाए हैं.

चीन कर रहा अनसुनी
भारत लगातार इस क्षेत्र में किसी निर्माण पर आपत्ति करता आया है. वहीं चीन अपने फायदे के लिए इसकी अनसुनी कर रहा है. चीन का कहना है कि भारत बेवजह बीच में आ रहा है. उसका तर्क है कि ये चीन और पाकिस्तान के बीच का समझौता है. और इस प्रोजेक्ट से लोगों का भला ही होगा. उसका कहना है कि एक तो निर्माण के दौरान लोगों को काम मिलेगा और दूसरे यहां से हर साल 18.1 अरब यूनिट बिजली का उत्‍पादन हो सकेगा. वहीं विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पाक-अधिकृत कश्मीर में चीन की विस्तारवादी रणनीति भारत के खिलाफ खुला खेल है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अब यही बांध चीन और भारत के बीच तनाव को और हवा दे सकता है. इस बारे में यूरेशियन टाइम्स में विल्सन सेंटर के एशियाई मामलों के जानकार माइकल कुगेलमन कहते हैं कि इससे भारत और चीन के बीच पहले से बढ़ा तनाव और बढ़ने जा रहा है. कुगेलमन का इशारा हाल ही में लद्दाख बॉर्डर पर चीन की घुसपैठ की कोशिश से है. इसी दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए. माना जा रहा है कि चीन का सैन्य नुकसान इससे कहीं ज्यादा था, जिस बारे में उसने अब तक मुंह नहीं खोला है.

पाकिस्तान के बहाने भारत को दे सकता है परेशानी
पाकिस्तान और चीन के बीच कई दूसरे मामलों में करार हुआ है. चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर इसमें से एक है. व्यापार बढ़ाने के लिए रास्ते छोटे और ज्यादा सस्ते करने के लिए ये प्रोजेक्ट शुरू हुआ, जो अब दूसरे चरण में पहुंचने वाला है. ऊपर से व्यापारिक महत्व के लगने वाले इस प्रोजेक्ट में भी चीन का भारत को परेशान करने का इरादा विशेषज्ञों को दिख रहा है. इस बारे में यूएई में नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रोफेसर मोहन मलिक मानते हैं कि ये भी भारत की कमजोरी का फायदा उठाने की चीन की नीतियों में से एक हो सकता है.

दूसरे देश भी हैं खिलाफ
पाकिस्तान में चीन का इतना पैसा लगाना दूसरे देशों को भी परेशान कर रहा है. खुद अमेरिका ने इन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध को कई बार कटघरे में रखा है. चीन कर्ज देकर जाल में फंसाने की नीति अपनाता है. पाकिस्तान में उसका इनवेस्टमेंट ऐसा ही है. वो पाक के जरिए व्यापार आसान करेगा और उसके कर्ज में डूबा पाक किसी भी बात पर विरोध नहीं कर सकेगा. ऐसा केवल पाकिस्तान ही नहीं, चीन भारत के सभी पड़ोसी देशों में कर रहा है. जैसे नेपाल में कर्ज देकर चीन ने उसे भी ट्रैप कर लिया. कथित तौर पर नेपाल के पीएम ने चीन से काफी रिश्वत भी ली. इसके बदले में वो भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं. इससे एशियाई देशों में चीन की स्थिति भारत से काफी मजबूत हो जाएगी जो आगे चलकर उसके काम आ सकती है.

श्रीलंका में चीन ने क्या किया?
श्रीलंका चीन की नीतियों का ताजा उदाहरण है. उस देश ने हंबनटोटा में डेढ़ बिलियन डॉलर के बंदरगाह को बनाने के लिए चीन की मदद ली. श्रीलंका को लगा कि इससे व्यापार में फायदा होगा और वो धीरे-धीरे कर्ज चुका सकेगा. हालांकि कर्ज नहीं चुका पाने के कारण उसे अपने ही बंदरगाह को चीन को लीज पर देना पड़ा. अब पूरे 99 सालों के लिए ये श्रीलंकाई बंदरगाह चीन का है. अफ्रीकन देशों में भी चीन ने कर्ज दो और गुलाम बनाओ, वाली नीति ही अपना रखी है

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