प्राचीन धरोहरों को सहेजने से दुनिया में देश का होगा नाम :डॉ़ हरगोविंद कुशवाहा

झांसी: उत्तर प्रदेश में झांसी के राजकीय संग्रहालय में चल रहे विश्व विरासत सप्ताह के तहत रविवार को आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में प्राचीन धरोहरे होने और उनको सहेजकर पयर्टन विकसित किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया ।

दुनिया में देश का होगा नाम

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अंतर्गत राजकीय संग्रहालय और क्षेत्रीय पुरातत्व ईकाई -झांसी इंटैक तथा ललितपुर चैप्टर एवं बुंदेलखंड इतिहास पुरातत्व और संस्कृति शोध समिति के संयुक्त तत्वाधान में जारी विश्व धरोहर सप्ताह के तहत आज “ बुंदेलखंड के किले और गढ़ियां” विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए विद्वानों ने कहा कि विदेशों की अपेक्षा भारत में प्राचीन धरोहरें बहुत बड़ी संख्या में हैं, और भारत में बुंदेलखंड भी इस मामले में काफी समृद्ध है। इन धरोहरों को सहेजने से न केवल दुनिया में देश और इस क्षेत्र का नाम होगा बल्कि पर्यटन का काफी विकास होगा।

वेद ,पुराण, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ दुनिया को भारत ने दिए

इस अवसर पर राज्य मंत्री डॉ़ हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि दुनिया को नैतिकता का पाठ इस देश ने पढाया। हमने वेद ,पुराण, उपनिषद, वाल्मीकि रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ दुनिया को दिया। महाभारत से गीता निकली , हमने तुलसीकृत रामायण दी लेकिन हम स्वंय ही अपने गौरवशाली इतिहास से अनभिज्ञ हैं। आज का युवा उसी भारत को जानता है जो अंग्रेजी लेखकों ने अपने हितों को साधने के लिए लिखे। हम अपने विस्मृत गौरव को याद करना ही नहीं चाहते। उन्होंने युवावर्ग का आह्वान किया कि आयें और अपने देश और बुंदेलखंड के प्राचीन गौरवशाली इतिहास पर लेखनी चलाएं और दुनिया के साथ साथ खुद अपने लोगों को बतायें कि हम क्या थे। हमने पूरी दुनिया को क्या दिया है।

नारी सशक्तिकरण की नायिका थीं रानी लक्ष्मी बाई 

कार्यक्रम में पूर्व आईएएस पी के अग्रवाल ने महिला सशक्तीकरण की प्रतीक महारानी लक्ष्मीबाई पर शोधपरक व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने शोध में पाया कि रानी जितनी उस समय के जनमानस के दिलों में रची बसीं थीं उतनी आज भी। झांसी में अंग्रेजों का राज्य होने के बाद भी आमजन महारानी लक्ष्मीबाई को ही अपना शासक मानती थी। रानी के समय प्रशासनिक और व्यापारिक गतिविधियां चरम पर थीं। रानी ने दुर्गा वाहिनी का गठन कर और राज्य की महिलाओं को सशक्त करने का जो अद्भुत काम किया उसका कोई दूसरा उदाहरण दुनिया में नहीं मिलता है। वह नारी सशक्तिकरण की भी नायिका रहीं।

पर्यटन के स्थानीय केंद्रों को विकसित किये जाने की जरूरत

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर राहुल शुक्ला ने कहा कि पर्यटन के स्थानीय केंद्रों को विकसित किये जाने की जरूरत है, और इसके लिए पहल स्कूल और कॉलेज के स्तर से होनी चाहिए। मानव संसाधन मंत्रालय ने स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक इंडक्शन प्रोग्राम दिया गया है । इस कार्यक्रम में जिस शहर में विद्यार्थी पढ़ने गया है उस शहर के बारे में उसे बताएं। श्री शुक्ला ने कहा कि इसमें पुरातत्व विभाग को शामिल किया जा सकता है कि शहर में आने वाले विद्यार्थियों के लिए पुरातत्व विभाग के लोगों को बुलाकर क्षेत्र विशेष के पुरातात्विक इतिहास किले और गढियों के बारे मे विश्वसनीय जानकारी मुहैया करायी जा सकती है। यह अनिवार्य कार्यक्रम है जिसका इस्तेमाल स्थानीय पुरातत्व के बारे में युवाओं की रूचि बढ़ाने के सुनहरे अवसर के रूप में किया जा सकता है।

प्रो० बी बी लाल के 100 वर्ष में प्रवेश करने पर परिजनों को किया गया सम्मानित 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पुरातत्वविद् प्रो० बी बी लाल के जीवन के 100 वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।प्रो लाल ने सर्वप्रथम अयोध्या के एक प्राचीन टीले की खुदाई कर वहां मंदिर होने के सबूत पेश किये थे। इसके अलावा उन्होंने रामायण प्रोजेक्ट के अंतर्गत श्रीराम से संबंधित अनेक स्थलों के परातात्विक उत्खनन कर अनेक चौंकाने वाले साक्ष्य प्रस्तुत किये थे।

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