अखिलेश सरकार में हुए दंगो के मामले में अदालत ने 20 लोगों को किया बरी

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को साल 2013 के अखिलेश सरकार में मुजफ्फरनगर दंगों के एक मामले में सबूतों के अभाव में 20 लोगों को बरी कर दिया। मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश बाबूराम ने सुनवाई के दौरान सभी गवाहों के मुकर जाने के बाद लोगों को बरी कर दिया।

दंगों के विशेष वकील नरेंद्र शर्मा ने कहा कि मामला दंगों के दौरान कुटबी गांव में हुई हिंसा से जुड़ा है। दंगों के मामलों की जांच कर रहे एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 392, 436, 295, 147, 148 और 149 के तहत आरोपपत्र दायर किया था, जिसमें कथित तौर पर 8 सितंबर, 2013 को कई घरों में आग लगाने और लूटपाट करने का आरोप था।

शर्मा ने कहा कि दंगों से जुड़े मामलों की सुनवाई एडीजी की अदालत में चल रही है। 2014 के आम चुनावों से कुछ महीने पहले, मुजफ्फरनगर में जाट और मुस्लिम समुदायों के बीच अगस्त और सितंबर 2013 में हुए दंगों में कम से कम 60 लोग मारे गए थे और 50,000 अन्य विस्थापित हुए थे।

पुलिस ने दंगों के सिलसिले में 510 मामले दर्ज किए थे और 1,480 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच के बाद एसआईटी ने 175 मामलों में चार्जशीट दाखिल की। अब तक, स्थानीय अदालतों ने 98 मामलों का फैसला किया है और 1,137 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

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