न्यायालय ने दहेज मामले में आरोपी जगपाल की सशर्त जमानत मंजूर की

मृतका की शादी 2013 मे याची के बेटे हरवीर सिंह से हुई थी. मृतका शिखा की 18 जनवरी 2020 को मौत हो गयी. थाने में एफ आई आर दर्ज करायी गयी है.

 

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि जमानत एक नियम है और जेल अपवाद. यह दैहिक स्वतंत्रता का विषय है. जमानत आदेश यांत्रिक नही होना चाहिए. जमानत देने या न देने का कारण दिया जाय और यह भी देखा जाय कि अपराधी न्याय में बाधक न बनने पाये. इसी के साथ न्यायालय ने रामपुर के दहेज उत्पीड़न एवं हत्या के आरोपी जगपाल की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. और 29 जनवरी 2020 से जेल मे बंद याची की रिहाई का निर्देश दिया है.

यह न्यायाधीश के न्यायिक विवेक पर निर्भर है कि जमानत दे या नही. न्यायालय ने कहा कि जमानत देते समय आरोपी के अपराध दुहराने, साक्ष्य से छेड़छाड़, गवाहों को धमकी की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए. गवाहों की विश्वसनीयता, मामले का गुणदोष आदि केस के विचारण के समय देखे जायेगे. इसलिए जमानत देते या अस्वीकार करते समय इन पर विचार नही करना चाहिए.

न्यायालय ने कहा कि जमानत अर्जी पर विचार करते समय मनमानी नही, बल्कि सहानुभूति पूर्वक विवेक का प्रयोग करना चाहिए. जमानत की शर्ते इतनी कडी न हो कि पालन असंभव हो जाय. इसी के साथ न्यायालय ने रामपुर के दहेज उत्पीड़न एवं हत्या के आरोपी जगपाल की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. और 29 जनवरी 2020 से जेल मे बंद याची की रिहाई का निर्देश दिया है.

न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी ने कहा है कि मृतका की शादी 2013 मे याची के बेटे हरवीर सिंह से हुई थी. मृतका शिखा की 18 जनवरी 2020 को मौत हो गयी. थाने में एफ आई आर दर्ज करायी गयी है.

न्यायालय ने कहा कि सास मूर्ति देवी ऐसे ही आरोपों पर पहले से जमानत पर है. याची अपने बेटे बहू के साथ नही रहता था. घटना के पहले दहेज उत्पीड़न की कोई शिकायत नहीं है. याची का आपराधिक रिकार्ड नहीं है. ऐसे मे जमानत पर रिहा होने का अधिकारी है.

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