अदालत ने खारिज की आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के रिमांड की मांग

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गुजरात। आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को रिमांड में लेने की गुजरात पुलिस की मांग यहां की एक अदालत ने गुरुवार को खारिज कर दिया और उन्हें 22 वर्ष पुराने एक मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस की अपराध विभाग(सीआईडी) ने भट्ट को गिरफ्तार किया था और उसके बाद बुधवार को पालनपुर पुलिस थाने के इंस्पेक्टर आई.बी. व्यास को गिरफ्तार किया।
याचिका के विरुद्ध बहस करते हुए, बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि मामला दो दशक पुराना है और इससे संबंधित याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। दंडाधिकारी ने बहस को स्वीकार कर लिया और सीआईडी की मांग खारिज कर दी। अदालत ने दोनों अभियुक्तों को पालनपुर न्यायिक हिरासत में उप-कारागार भेज दिया।

जब यह कथित घटना 1996 में हुई थी, भट्ट बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक थे। जानकारी के अनुसार, बनासकांठा पुलिस ने एक किलोग्राम अफीम रखने के आरोप में एक वकील सुमेरसिंह राजपुरोहित को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था कि यह मादक पदार्थ पालनपुर में राजपुरोहित के होटल के कमरे में पाया गया था।

लेकिन बाद में, एक जांच से पता चला कि राजपुरोहित पर दबाव बनाने के लिए उसे पुलिस द्वारा गलत तरीके से फंसाया गया था, ताकि वह राजस्थान के पाली में अपने विवादस्पद संपत्ति को खाली कर दे। शिकायत के आधार पर, गुजरात उच्च न्यायालय ने जून में इस मामले को सीआईडी को सुपूर्द किया था और तीन महीने में जांच पूरी करने के लिए कहा था।

सीआईडी के अधिकारियों ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि पूर्व आईपीएस अधिकारी और अन्य ने कथित रूप से मादक पदार्थ रखकर राजपुरोहित को गिरफ्तार करने की साजिश रची थी। ताकि वह इस दबाव के बाद विवादास्पद संपत्ति खाली कर दे। 2002 के गुजरात दंगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले भट्ट को अगस्त 2015 में सेवा से ‘अनधिकृत रूप से अनुपस्थित’ रहने के लिए हटा दिया गया था।

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