आयुष्मान योजना पर संकट, इन दो बीजेपी शासित राज्यों ने ‘NHPM’ लागू करने से किया मना

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महात्वकांक्षी परियोजना नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन (एनएचपीएम) पर दो राज्यों में संकट खड़ा हो गया है। भाजपा शासित दो राज्यों महाराष्ट्र और राजस्थान ने आयुष्मान भारत स्कीम को लागू करने से इनकार कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के 22 हजार करोड़ रुपए के ऋण माफी की इसकी वजह बताया है। वहीं राजस्थान सरकार ने भी इस मिशन को लागू करने को लेकर चिंता जताई है। ओडिशा पहले ही एनएचपीएम को लागू करने से मना कर चुका है। वहीं पंजाब और दिल्ली सरकार भी इस पर टाल-मटोली कर रही है।

दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी हर हाल में 15 अगस्त को पांच लाख रुपए के स्वास्थ्य बीमा की योजना आयुष्मान भारत लॉन्च करना चाहते हैं। जिसके मद्देनजर हाल ही में मुंबई में आयुष्मान भारत सेक्रेटेरिएट के अधिकारियों की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में महारष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री दीपक सावंत और चीफ सेक्रेटरी डीके जैन ने राज्य में कर्जमाफी के चलते पूंजी की कमी होने की बात कही थी। सावंत ने कहा था कि राज्य सरकार पूंजी की कमी होने के चलते एनएचपीएम का अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकती है।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में पहले से ही सबसे व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक स्कीम है। सरकार ने कहा है कि वर्तमान में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के तहत 2।2 करोड़ लोगों को दो लाख का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है, जबकि आयुष्मान भारत के तहत सिर्फ 80 लाख को ही लाभ मिलेगा। हालांकि 25 राज्य आयुष्मान भारत के पैनल पर आ चुके हैं।

उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र की समस्या को लेकर कहा, ‘हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के लिए प्रदेश में कितने पैसे लगेंगे यह अभी साफ नहीं है। अगर वर्तमान लाभार्थियों को छोड़ दिया जाएगा, तो बड़ा प्रतिरोध झेलना पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ किसानों की कर्ज माफी के कारण सरकार के सामने पूंजी को लेकर और भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।’

राजस्थान में भी महाराष्ट्र की तरह ही पहले से ही स्वास्थ सुरक्षा योजना चल रही है। यहां भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना (बीएसबीवाई) है, जिसके तहत राज्य के 4.5 करोड़ लोगों को मुफ्त में स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं दी जाती हैं, इसमें अधिकतम सीलिंग 3.30 लाख रुपए है। ऐसे में वसुंधरा राजे सरकार के सामने यह समस्या है कि एनएचपीएम और बीएसबीवाई को एक ही स्थान पर कैसे लाया जाए।

मोदी सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘राजस्थान सरकार इस बात को लेकर अभी स्पष्ट नहीं है कि उनके राज्य में दोनों स्कीम को एकसाथ कैसे लागू किया जाए, क्योंकि राज्य के पास खुद एक योजना है और इस योजना को पाने के लिए सरकार ने हेल्थ कार्ड दिया हुआ है।’ हालांकि राजस्थान सरकार के पास किसी प्रकार की वित्तीय समस्या नहीं है।

Related Articles