करी पत्ते के होते है कई फायदे, औषधीय गुणों और विशेषताओं से भरपूर

दक्षिण भारत में इसे लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है. इसके औषधीय गुणों और विशेषताओं को देखते हुए इसका उपयोग अब देश के अधिकतर हिस्सों में किया जाने लगा है. कुछ लोग इसे “मीठी नीम की पत्तियां” भी कहते हैं. इसके तमिल नाम का अर्थ है, ‘वो पत्तियां जिनका इस्तेमाल रसेदार व्यंजनों में होता है’. कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है – “काला नीम”, क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती-जुलती हैं. लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है.

करी पत्ता का इस्तेमाल सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि बालों को लंबे, घने और काले बनाने में भी किया जा सकता हैं. करी पत्ता एंटी ऑक्सिडेंट के गुणों से भरपूर होता है. यहीं एंटीऑक्सिडेंट मुक्त कणों को बेअसर करते हैं और आपके बालों को स्वस्थ और मजबूत रखते हैं. इसमें मौजूद पोषक तत्व बालों के झड़ने और पतले होने को रोकते हैं. इसमें अमीनो एसिड भी पाया जाता है जो स्कैल्प को मजबूत करने और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.

करी पत्ते में में डाइक्लोरोमेथेन, एथिल एसीटेट और महानिम्बाइन जैसे खास तत्व पाए जाते हैं. इन तत्वों में वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ट्राइग्लिसराइड (एक प्रकार का फैट) के स्तर को नियंत्रित करने की क्षमता पाई जाती है. त्वचा के संक्रमण का उपचार करी पत्ता में मौजूद एंटी ऑक्सिडेंट, बैक्टीरिया रोधी और कवक रोधी गुण त्वचा में हुए संक्रमण को दूर करने में सहायक हैं. करी पत्ते का फेस पैक लगाने से मुंहासे, रुखापन, दाग-धब्बे, बढ़ती उम्र के प्रभाव व झुर्रियां दूर करने में मदद मिलती है. फेस पैक बनाने के लिए करी पत्ते को धूप में सुखाकर पीस लें. पाउडर में गुलाब जल, मुल्तानी मिट्टी, थोड़ा-सा चंदन और नारियल तेल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. इस फेस पैक को हल्के हाथों से चेहरे पर लगाएं. 15-20 मिनट बाद फेस पैक सूखने पर ठंडे पानी से धो लें.

करी पत्ता रक्त में एचडीएल यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाकर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित बनाए रखता है. यह दिल से जुड़ी बीमारियों से दूर रहने में मदद करता है. इसलिए अपने भोजन में करी पत्ता को नियमित रूप से शामिल करना चाहिए. ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए भी करी पत्ते के सेवन की सलाह दी जाती है. करी पत्ते में मौजूद फाइबर इन्सुलिन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं जिससे ब्लड-शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.

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