इस जिले में बढ़े (Cyber Crimes) साइबर अपराध, जानें अपराधों का लेखा-जोखा

गौतमबुद्ध नगर में आर्थिक और साइबर अपराध बढ़े, पुलिस आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2019 में कुल 82 मुठभेड़ हुए थे जबकि इस वर्ष 135 मुठभेड़ हुई

नोएडा: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में गौतमबुद्ध नगर जिले में पुलिस आयुक्तालय बनने के बाद से गंभीर अपराधों में बेहद कमी आई है लेकिन साइबर और आर्थिक अपराधों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की है। जिले के पुलिस आयुक्त आलोक सिंह ने यहां वार्षिक बैठक के बाद संवाददाताओं को इस आशय की जानकारी दी।

पुलिस आयुक्त का बयान

पुलिस आयुक्त आलोक सिंह ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली की स्थापना के बाद जिले के विभिन्न हिस्सों का गहन अध्ययन किया गया। उसके बाद सामाजिक, आर्थिक विविधता और गतिशीलता के मद्देनजर प्रभावी पुलिसिंग के लिए जिले को तीन हिस्सों नोएडा, मध्य नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बांटा गया।

उन्होंने बताया कि दूसरे सुधार के तहत साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा और गंभीर अपराधों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि जिले में कमिश्नरेट (आयुक्तालय) प्रणाली लागू होने के बाद विभाग के राजपत्रित अधिकारियों के पदों में 23 और सभी अराजपत्रित अधिकारियों की उपलब्धता में 1163 की वृद्धि हुई है। डॉयल-112 के वाहनों में वर्ष 2019 के मुकाबले इस वर्ष 40 गाड़ियां बढ़ाई गई है।

2019 में कुल मुठभेड़

पुलिस आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2019 में कुल 82 मुठभेड़ हुए थे जबकि इस वर्ष 135 मुठभेड़ हुई। इसी तरह बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष मुठभेड़ में 150 के मुकाबले 244 बदमाशों की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने इनामी बदमाशों की संख्या में भी इजाफा होने का दावा किया और कहा कि बीते वर्ष 31 के मुकाबले इस वर्ष 46 अपराधियों की गिरफ्तारी की गई। इसी तरह बीते वर्ष कुल 81 बदमाश पुलिस मुठभेड़ में जख्मी हुए थे जबकि इस वर्ष यह संख्या 184 हो गई।

Cyber Crimes

आलोक सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2019 में तीन डकैती हुई थी जबकि इस वर्ष डकैती की सिर्फ एक ही घटना हुई है। इसमें 67 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इसी तरह लूट की वारदार पिछले वर्ष 161 और इस वर्ष सिर्फ 64 हुई है। इसमें 60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। चेन स्नैचिंग पिछले वर्ष 571 थी जो इस वर्ष 398 रही। इसमें भी 30 फीसदी की कमी आई है।

उन्होंने बताया कि इस जिले में वाहन चोरी सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन इस पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में कामयाबी मिली है। बीते वर्ष वाहन चोरी की 2215 घटनाएं हुई थीं, लेकिन इस वर्ष यह सिर्फ 1160 ही रही। इसमें भी 48 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। पुलिस आयुक्त ने यह भी बोला कि सामान्य चोरी की वारदात भी 1456 के मुकाबले इस वर्ष सिर्फ 693 ही रही। इसमें 53 फीसदी कमी आई है।

पिछले वर्ष जिले में हत्या की वारदातें

पुलिस आयुक्त ने बताया कि पिछले वर्ष जिले में हत्या की 88 वारदातें हुई थीं जबकि इस वर्ष हत्या की 72 घटनाएं हुई हैं। इसमें लगभग 18 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा हत्या के प्रयास के मामले गत वर्ष 142 के मुकाबले इस वर्ष 94 हुई हैं। इसमें 34 प्रतिशत की कमी आई है।

उन्होंने बताया कि फिरौती के लिए अपहरण और दूसरे अपहरण की वारदात में कोई खास कमी नहीं हुई है, लेकिन दुष्कर्म के मामलों में 61 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। गत वर्ष जहां दुष्कर्म के 89 मामले दर्ज हुए थे, इस वर्ष यह संख्या सिर्फ 35 रही। इसमें 61 फीसदी की उत्साहजनक कमी दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि जिले में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद संगठित अपराध में लिप्त माफिया, भूमाफिया और अन्य अपराधियों पर जबरदस्त प्रहार किया गया है। गत एक वर्ष में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई।

अपराधों के वार्षिक लेखा-जोखा

आलोक सिंह ने अपराधों के वार्षिक लेखा-जोखा के बीच कोरोना काल में पुलिस के काम को बताना नहीं भूले। उन्होंने बताया कि पुलिस की विश्वसनीयता का ही परिणाम रहा कि 40 से अधिक एनजीओ के लोग पुलिस के साथ जुड़े। पुलिस ने भी दवाएं और राशन पहुंचाने का काम किया। आपात हेल्पलाइन 112 पर 1500 कॉल मिली, जिन्हें तत्काल मदद पहुंचाई गई। उन्होंने बताया कि सीपी कार्यालय में स्थापित गोदामों से तीन लाख से अधिक लोगों को राशन, पका हुआ भोजन, मास्क, सेनिटाइजर और सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराया गया।

उन्होंने बताया कि जिले में कानून और शांति व्यवस्था कायम रखने और अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के मकसद से नई कार्ययोजनाओं में 11 थाने और दो पुलिस चौकियों की स्थापना का काम चल रहा है। इनमें पांच थाने जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी में स्थापित किए जाने हैं।

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