यूपी के दलित अब किसी को भी बेच सकेंगे अपनी जमीन

akhileshm1लखनऊ। यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश पास कर दिया है। अब राज्य में दलित किसी को भी अपनी जमीन बेच सकेंगे। भले ही उनके पास 3.25 एकड़ से कम जमीन हो। पट्टे पर खेती को भी वैधानिक मंजूरी मिल गई है। अध्यादेश में जमीन से जुड़े अन्य प्रावधान भी किए गए हैं। एक महीने पहले कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी थी।

मॉनसून सत्र में प्रदेश सरकार जमींदारी उन्मूलन अधिनियम सदन में लाई थी। विपक्षी दलों, खासकर बीएसपी के विरोध के कारण वह विधान परिषद में पारित नहीं हो सका। उसमें दलितों की जमीन बेचने का मुद्दा ही विरोध की वजह था। उसके बाद सरकार रेवेन्यू कोड आर्डिनेंस लेकर आई। सरकार को डर था कि अगर इस संबंध में भी विधेयक लाया गया तो बीएसपी उसे भी विधान परिषद से पास नहीं होने देगी।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब सरकार का आगे का रास्ता साफ हो गया है। ऑर्डिनेंस पास होने के बाद उसे छह माह में सदन में पास करवाना होता है। सरकार इससे पहले इसे सदन से पास करवा लेगी। इसकी वजह यह है कि तब तक विधान परिषद की खाली हो रही 36 सीटों पर चुनाव हो चुके होंगे। इनमें से 34 सीटें अभी बीएसपी के खाते में हैं। चुनाव होने के बाद विधान परिषद में भी सपा का बहुमत हो जाएगा।

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ऑर्डिनेंस में क्या है खास

1-सरकारी जमीन पर दिए जाने वाले पट्टे में अब उसकी पत्नी भी सह खातेदार होगी। दोनों के बीच विवाद की स्थिति में वह बराबर की हिस्सेदार होगी। पट्टा हासिल करने के बाद पति की मौत पर भी पत्नी हकदार होगी।

2-कोई भी व्यक्ति 5.0586 हेक्टेअर से ज्यादा जमीन सरकार की अनुमति के बिना नहीं खरीद सकेगा। यदि उसके पास पहले से जमीन है तो उसको जोड़कर कुल सीमा इतनी होनी चाहिए। इससे व्यावसायिक उपयोग के लिए किसानों से सस्ती जमीन खरीदने वालों पर लगाम लगेगी।

3-पैतृक जमीन की खतौनी में कई खातेदार होते हैं। उसमें यह साफ नहीं होता कि कौन सी जमीन किसकी है। यदि आठ खातेदार हैं तो 1/8 लिखा होता है। अब जमीन की खतौनी में सह-खातेदारों के नाम के साथ उनके हिस्से का उल्लेख किया जाएगा। जमीन का भी सीमांकन होगा।

4-बड़ी योजनाओं के लिए अर्जित भूमि के बीच में पड़ने वाली लोक उपयोगिता की श्रेणी बदलने के लिए सरकार सक्षम होगी।

5-राजस्व विवादों के निस्तारण के लिए उप जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी न्यायिक और अपर आयुक्त न्यायिक की नियुक्ति सरकार कर सकेगी। अभी तक तहसीलदार न्यायिक का ही प्रावधान था।

6-खाली जमीन पर चहारदीवारी बनाने भर से ही यह नहीं हो जाएगा कि वह उसका मालिक है।

7-जमीन संबंधी वादों के निस्तारण के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर राजस्व समिति होगी। वहां आपसी सुलह से सह खातेदारों के हिस्सों को तय किया जा सकेगा।

8-किसी बकाएदार पर 50 हजार रुपए से कम बकाया है तो उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी।

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