सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने किया आज भारत बंद, सड़को पर उमड़े लोग

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नई दिल्ली। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में कुछ बदलाव किया गया था। इस बात से दलित संगठनों में नाराजगी व्याप्त है। अपने गुस्से को जाहिर करते हुए आज इन संगठनों ने देशभर में भारत बंद का ऐलान किया है। देश के अलग-अलग राज्यों में इस बंद का असर दिखने लगा है। इसके चलते पंजाब में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा कैंसिल कर दी गई है। वहीं उड़ीसा के संभलपुर में लोगों ने ट्रेनों का आवागमन रोक दिया है। इन संगठनों की मांग है कि कोर्ट इस एक्ट को पहले जैसा ही कर दे।

बिहार, पंजाब और उड़ीसा में देखने को मिला बंद का असर
आज सुबह से ही दलित संगठन अपने इस भारत बंद को सफल बनाने के लिए प्रयासरत हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में बंद के चलते लोगों को तकलीफो का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक तरफ भीम सेना ने बिहार के अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, जहानाबाद और आरा में रेल रोकी और सड़कों पर जाम लगा दिया।

वहीं दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने प्रदेश में शैक्षणिक संस्थान बंद रखने के साथ-साथ मोबाइल सेवाएं भी बंद कर दी हैं। इसके अलावा उड़ीसा में भी संगठन के लोगों ने रेल यातायात प्रभावित किया। पंजाब में बंद के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित घटना से निपटने के लिए सेना की तैनात की गई है।

बंद का असर गुजरात तक पहुंच चुका है। यहां विधायक और खुद को दलित नेता बताने वाले जिग्नेश मेवानी भी भारत बंद में शामिल हुए हैं। मेवानी ने ट्वीट कर लोगों से भारत बंद में शामिल होने की अपील की है।

इसके अलावा अगर इस बंद को देश की राजनीतिक पार्टियों द्वारा मिल रहे समर्थन की बात करें तो भारत बंद को बिहार में राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव का समर्थन मिला है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने मामले पर दिया बयान
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निश्चित तौर पर रिव्यू पिटिशन डाला जाना चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ठीक से पक्ष क्यों नहीं रखा, इसकी जांच होनी चाहिए।

बंद से डरी सरकार आज दाखिल करेगी पुनर्विचार याचिका
बंद का व्यापक असर देखते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय द्वारा दाखिल किए जाने वाली इस याचिका में यह तर्क दिया जा सकता है कि कोर्ट के फैसले से एससी और एसटी एक्ट 1989 के प्रावधान कमजोर हो जाएंगे। आपको बता दें कि कोर्ट ने इस एक्ट के तहत होने वाली त्वरित गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। जिस कारण दलित संगठन नाराज चल रहे हैं।

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