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‘दांडी यात्रा’ को 91 साल हुए पूरे, पदयात्री Dandi के लिए हुए रवाना, जानिएं नमक के ऊपर कर लगाने वाले कानून

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से नवसारी में दांडी तक जाने वाले 81 पदयात्रियों को झंडी दिखाकर रवाना किया।

अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) में आजादी के 75वें साल के जश्न की शुरुआत की। जश्न के इस कार्यक्रम का नाम दिया गया है आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ (Amrit Mahotsav’ of independence)। इसके साथ ही महात्मा गांधी की ऐतिहासिक ‘दांडी यात्रा’ (Dandi Yatra) को 91 साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए पीएम मोदी ने साबरमती आश्रम से नवसारी में दांडी तक जाने वाले 81 पदयात्रियों को झंडी दिखाकर रवाना किया।

अमृत महोत्सव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के अहमदाबाद में स्थित साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) से अमृत महोत्सव (Amrit Mahotsav) की शुरूआत किए हैं। इससे पहले PM साबरमती आश्रम में पहुंचकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की। 75 वर्षों की उपलब्धियां पीएम मोदी ने कहा कि, आजादी के अमृत महोत्सव का आयोजन हमारे 75 वर्षों की उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखेगा और अगले 25 वर्षों के लिए हमें एक रूपरेखा, एक संकल्प भी देगा।

नमक के ऊपर कर लगाने के कानून

दांडी यात्रा को नमक मार्च और दांडी सत्याग्रह के रूप में भी जाना जाता है जो सन् 1930 में महात्मा गांधी के द्वारा अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया गया सविनय कानून भंग कार्यक्रम था। ये ऐतिहासिक सत्याग्रह कार्यक्रम गांधी जी समेत 78 लोगों के द्वारा अहमदाबाद साबरमती आश्रम से समुद्रतटीय गांव दांडी तक पैदल यात्रा 390 किलोमीटर की दूरी तय करके 06 अप्रैल 1930 को नमक हाथ में लेकर नमक विरोधी कानून का भंग किया गया था।

सत्याग्रहियों ने खाई अंग्रेजों की लाठियां

भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के समय नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर बड़ी मात्रा में कर लगा दिया था और नमक जीवन के लिए जरूरी चीज होने के कारण भारतवासियों को इस कानून से मुक्त करने और अपना अधिकार दिलवाने हेतु ये सविनय अवज्ञा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कानून भंग करने के बाद सत्याग्रहियों ने अंग्रेजों की लाठियां खाई थी परंतु पीछे नहीं मुड़े थे। 1930 को गाँधी जी ने इस आंदोलन का चालू किया। इस आंदोलन में लोगों ने गाँधी के साथ पैदल यात्रा की और जो नमक पर कर लगाया था। उसका विरोध किया गया। इस आंदोलन में कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। जैसे-सी राजगोपालचारी, पंडित नहेरू, आदि। ये आंदोलन पूरे एक साल तक चला और 1931 को गांधी-इर्विन के बीच हुए समझौते से खत्म हो गया।

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