पेंट, वार्निश ऐसे ही अन्य रसायनों के संपर्क में रहने पर ‘एमएस’ का खतरा

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नई दिल्ली: पेंट, वार्निश और ऐसे ही अन्य रसायनों के लगातार संपर्क में रहने से मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) होने का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यह एक नए शोध में पता चला है। धूम्रपान करने वाले लोग अगर पेंट, वार्निश के बीच रहते हैं और जिनमें एमएस जीन होते हैं, वे उन लोगों की तुलना में एमएस विकसित होने की 30 गुना अधिक संभावना रखते हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है या कभी पेंट आदि के संपर्क में नहीं आए हैं।

हाल के वर्षो में एमएस का प्रसार नाटकीय रूप से दुनियाभर में बदला है, भारत भी इसका अपवाद नहीं है। प्रारंभ में, उत्तरी यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के काकेशियनों में एमएस अधिक आम माना जाता था। हालांकि, यह भारतीय उपमहाद्वीप में भी मौजूद है। वैश्विक स्तर पर, इस दशा से करीब 23 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि भारत में लगभग 2 लाख रोगी हैं।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “एमएस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को संभावित रूप से अक्षम करने वाली बीमारी है। हालांकि इसकी शुरुआत आम तौर पर युवावस्था के आसपास होती है, लेकिन यह बच्चों को भी प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति के इलाज के लिए महंगी दवाएं और खाई जा सकने वाली दवाओं का मिल न पाना एक बड़ी समस्या है।”

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इंजेक्शन से दी जाने वाली दवाएं (जो इलाज के लिए अक्सर उपलब्ध रहती हैं) 50 हजार रुपये तक की लागत में आती हैं। यह हालत कमजोर करके रख देती है, जिससे बहुत से लोग डिप्रेशन में भी चले जाते हैं। चिंता और नकारात्मक विचारों से बचने के लिए लोगों को शुरुआत में ही एमएस का परीक्षण करवाने की सलाह देना जरूरी है।”

प्रभावित तंत्रिका फाइबर किस स्थान पर है, इसके आधार पर एमएस के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और बीमारी के दौरान इनमें भिन्नता आ सकती है। इनमें से कुछ में, एक या अधिक अंगों का सुन्न पड़ जाना या कमजोरी आ जाना, नजर का आंशिक या पूरा नुकसान, दोहरी दृष्टि, शरीर में झुकाव या दर्द, बिजली का झटका सा लगना, कंपकंपी, समन्वय की कमी या चाल में लड़खड़ाहट, बोलने में कठिनाई, थकान, चक्कर आना और आंत्र और मूत्राशय संबंधी समस्याएं प्रमुख हैं।

डॉ. अग्रवाल ने बताया, “एमएस के लिए अभी तक कोई रोकथाम नहीं है, जबकि नई दवाओं, प्रतिरक्षा प्रणाली में संशोधन और संभावित कारणों की पहचान करने के अन्य तरीकों के विकास के लिए शोध चल रहा है। एमएस प्रभावित लोगों की सामान्य जीवन प्रत्याशा होती है, यानी वे सामान्य लोगों जितना जी सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि सही उपचार न होने पर यह चलने-फिरने में दिक्कत कर सकता है और यहां तक कि निमोनिया जैसी जटिलताओं में भी बदल सकता है।

कुछ सुझाव :

* फल और सब्जियों, लीन प्रोटीन, और ओमेगा-3 फैटी एसिड वाला स्वस्थ आहार खाएं।

* प्रत्येक स्टेज में एमएस के रोगियों में शरीर का मूवमंेट महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम से लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलती है, संतुलन अच्छा रहता है और सामान्य एमएस जटिलताओं में भी मदद मिलती है।

* अच्छी नींद के लिए एक टाइम टेबल का पालन करें, कमरे में अंधेरा हो और ठंडक हो, सोने से पहले अधिक तरल न लिए हों, और सोने की जगह आरामदायक हो, तो अच्छी नींद प्राप्त हो सकती है।

* विटामिन डी खूब प्राप्त करें। हाल के शोध के मुताबिक, एमएस वाले लोग विटामिन डी की कमी से होने वाले रोगों की चपेट में भी आ जाते हैं।

* एमएस की बीमारी में धूम्रपान एक बड़ा जोखिम कारक है। लक्षणों का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए धूम्रपान की आदत छोड़ दें।

* यदि आप निराश महसूस करते हैं तो अपने नजदीकी और प्रियजनों से बात करें। यह आपको बेहतर और सकारात्मक महसूस करने में मदद करेगा। दिन के दौरान कुछ समय के लिए मेडिटेशन यानी ध्यान करने का प्रयास करें।

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