पुण्यतिथी: कामयाबी का नायाब इतिहास रचा लेकिन जिन्दगी दर्द से भरी रह गई…

मुंबई। मीना कुमारी एक ऐसा मशहूर नाम जिसे शायद ही कभी कोई भूल पाए। उनकी लिखीं हुई कुछ गज़लें, शायरी पढ़कर दिल न जाने किन किन गलियों में टहलने लगता है। उनकी लिखी हुई गज़ल न इन्तज़ार, न आहट, न तमन्ना, न उम्मीद फिर भी ज़िन्दगी है कि यूं बेहिस हुई जा रही है… और दूसरी इतना कह कर बीत गई हर ठंडी भीगी रात, सुख के लम्हे, दुख के साथी, तेरे ख़ाली हाथ… काफी मशहूर हुई।

बचपन से लेकर आखिरी सांस तक दुखों का साथ लिए जीने वाली मीना कुमारी उर्फ महजबीन को ट्रेजडी क्वीन भी कहा जाता है। कहा जाता है उनके इस दुनिया में कदम रखते हीं उनकी पारिवारिक हालत कुछ ऐसी थी कि उनके माता पिता ने उन्हें यतीमखाने के बाहर सीढ़ीयों पर छोड़ने का फैसला कर लिया था।

छोटी सी उम्र में शुरु किया काम-
लेकिन कहते हैं न एक पिता अपने बच्चे से कभी दूर नहीं रह सकता और बाद में उन्हें यतीमखाने से वापस लाकर किसी तरह उनकी परवरिश की। बढ़ती उम्र के साथ साथ मीना कुमारी को भी अपनी जिम्मेदारी का एहसास होने लगा और उन्होंने छोटी सी उम्र में ही फिल्मों में काम करना शुरु कर दिया था। बेबी मीना के नाम से पहली बार फिल्‍म ‘फरजद-ए-हिंद’ में नजर आईं। इसके बाद लाल हवेली, अन्‍नपूर्णा, सनम, तमाशा आदि कई फिल्‍में कीं। यूं तो इन्होंने फिल्में बहुत की लेकिन इनको ‘बैजू बावरा’ ने स्टार बना दिया। लिहाज़ा धीरे धीरे इन्होंने शोहरत की बुलंदियों को छूना शुरु कर दिया।

फिल्मों के इस दौर में मीना कुमारी की मुलाकात एक ऐसे इंसान से हुई जिसके बाद उनके दिल में प्यार ने दस्तक देना शुरु कर दिया। वो शख्स था कमाल अमरोही, लेकिन वह एक शादीशुदा इंसान थे। दोनों एकदूसरे से बेंइतहा मोहब्बत करने लगे थे लेकिन मीना उनसे निकाह करने को तैयार न थी। किसी तरह उनके दोस्तों ने उन्हें मनाया और दोनों ने निकाह किया पर ये रिश्ता उनके मीना के पितो को मंजूर नहीं था और उन्होंने दोनों का तलाक करा दिया था।

कहा ये भी जाता है कि गुलजार का एक्ट्रेस मीना कुमारी के साथ अफेयर था। इसी वजह से उनके और राखी के बीच दूरियां पैदा हुई। बता दें, मीना कुमारी ने अपने आखिरी वक्त में अपनी लिखी हुई शायरियां सिर्फ गुलजार को ही सौंपी थीं।

33 साल लंबे फिल्म कैरियर में उनकी कुछ फ़िल्में हैं- परिणीता, दो बीघा ज़मीन, फुटपाथ, एक ही रास्ता, शारदा, बैजू बावरा, दिल अपना और प्रीत पराई, कोहिनूर, आज़ाद, चार दिल चार राहें, प्यार का सागर, बहू बेगम, मैं चुप रहूंगी, दिल एक मंदिर, आरती, चित्रलेखा, साहब बीवी गुलाम, सांझ और सवेरा, मंझली दीदी, भींगी रात, नूरज़हां, काजल, फूल और पत्थर, पाकीज़ा, मेरे अपने और गोमती के किनारे।

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