लीवर सर्जरी और ट्रांसप्लांटेशन को लेकर मेदांता में हुई गहन चर्चा

गुरुग्राम| मेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर ट्रांसप्लांटेशन एंड रीजेनरेटिव मेडिसिन में चौथे इंटरनेशनल लिवर सिम्पोजियम (आईएलएस) का आयोजन किया गया। दिल्ली से सटे गुरुग्राम के द लीला एम्बीयंस में हुई इस संगोष्ठी में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विश्व स्तर के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और लीवर सर्जरी और ट्रांसप्लांटेशन को लेकर यहां उपस्थित लोगों को जानकारियां दी।

संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने हेपैटोलॉजी (लीवर, पित्ताशय-गॉलब्लैडर और अग्न्याशय-पैनक्रियास के अध्ययन की शाखा), लिवर सर्जरी और ट्रांसप्लांटेशन पर अपना दृष्टिकोण व नवीन जानकारियां साझा की और साथ ही लीवर की बीमारी तथा ट्रांसप्लांटेशन से संबंधित व्यवहार और दिशा पर चर्चा की। शुक्रवार से रविवार तक चला तीन दिवसीय यह आयोजन ‘डीबेट्स इन लिवर डिजीज एंड ट्रांसप्लांटेशन’ पर आधारित था।

भारत देश की वयस्क आबादी का 30 प्रतिशत फैटी लिवर से ग्रसित है। लिवर कैंसर भारत में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। यहां उपचार के अग्रणी विकल्प और सर्जरी की चर्चा हुई, जो इन मामलों के लिए खास हैं।

डॉ. ए.एस. सोइन ने मेदांता के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत प्रोटोकोल के बारे में बताया, जो अब चौथे स्तर के कैंसर को सफलतापूर्वक ठीक करता है और इसके लिए साइबरनाइफ तथा टीएआरई को मिलाया जाता है तथा बाद में ट्रांसप्लांट किया जाता है।

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