कुलभूषण जाधव मामले में नियुक्त बचाव पक्ष के वकील नहीं करेंगे पैरवी

कुलभूषण जाधव मामले में नियुक्त बचाव पक्ष के वकील नहीं करेंगे पैरवी

कराची: इस्लामाबाद हाई कोर्ट द्वारा भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में बचाव में पैरवी करने वाले वकील ने कोर्ट में पेश होने से मना कर दिया है. रजिस्ट्रार ऑफिस में अफसोस जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि वो कुलभूषण जाधव का कोर्ट में बचाव नहीं करेंगे. आपको बता दे की इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने दो वरिष्ठ वकीलो- मखदूम अली खान और आबिद हसन मिंटो को कुलभूषण मामले में बचाव पक्ष का वकील नियुक्त करने की बात कही थी . लेकिन दोनों वकीलों ने मंगलवार को केस लड़ने से इंकार कर दिया.

जरूरी काम बता किया किनारा

जहाँ आबिद हसन मिंटो का कहना है कि वो रिटायर हो चुके हैं और लंबे समय से प्रैक्टिस में नहीं कर रहे है . वहीं मखदूम अली खान ने कुछ जरूरी काम होने की बात कह कर किनारा कर लिया.

क्वींस काउंसिल से जांच की मांग है अवास्तविक

गौरतलब है की भारत ने “जाधव” मामले में निष्पक्ष सुनवाई के लिए क्वींस काउंसिल या फिर बाहर के वकील की मांग की थी पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाहिद हाफिज चौधरी ने इस मांग को अवास्तविक बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय चलन के मुताबिक पकिस्तान की अदालतों में उन वकीलों को ही पेश होने और पैरवी करने की अनुमति है, जिनके पास पकिस्तान में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस हो.

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नहीं किया अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का परिपालन

बता दे कि 17 सितंबर को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का परिपालन न करने का आरोप लगाया था. उन्होंने मांग की थी कि कुलभूषण को बिना किसी शर्त के राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराई जाये साथ ही निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई के लिए एक भारतीय वकील या क्वींस काउंसल नियुक्त की जाए.

भारत ने कुलभूषण जाधव मामले में क्वींस काउंसिल को दलीलें देने की अनुमति देने की मांग की थी, बता दे की क्वींस काउंसिल ब्रिटेन की महारानी का प्रतिनिधित्व करने वाला अधिवक्ता होता है.

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ब्रिटेन के अलावा कॉमनवेल्थ देशों में महारानी की तरफ से प्रतिष्ठित वकीलो की क्वींस काउंसिल नियुक्त की जाती है,
भारत के साथ साथ कई देशों में इस पद समाप्त कर दिया है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में क्वींस काउंसिल का चलन अब भी है.

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