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जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर दिल्ली सरकार ने केंद्र से मांगी मदद

दिल्ली सरकार ने केंद्रीय वित्तमंत्री से करों में दिल्ली को समुचित हिस्सा देने का अनुरोध किया है।

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने केंद्रीय वित्तमंत्री (Union Finance Minister) से करों में दिल्ली (Delhi) को समुचित हिस्सा देने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार के मुताबिक केंद्रीय कर, केंद्रशासित राज्यों को केंद्र सहायता और आपदा प्रबंधन कोष में दिल्ली (Delhi) को जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर सहायता दी जानी चाहिए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट 2021-22 पर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्तमंत्रियों के साथ सोमवार को एक बजट पूर्व बैठक की। इस दौरान दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने यह मांग की।

उन्होंने कहा, “2001-02 से लेकर अब तक बीस साल में केंद्रीय करों में दिल्ली का हिस्सा मात्र 325.00 करोड़ रुपए पर सीमित रखा गया है। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र होने के साथ ही यहां विधानसभा भी है। लेकिन केंद्रीय वित्त आयोग के टर्म ऑफ रिफ्रेंस में दिल्ली को शामिल नहीं किया गया है। इसे केंद्रीय करों में मात्र 325.00 करोड़ रूपयों का तदर्थ अनुदान मिलता है।”

उपमुख्यमंत्री ने कहा, “देश की राजधानी होने और तेजी से बढ़ता महानगर होने के नाते दिल्ली सरकार पर विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की चुनौती है। साथ ही, व्यापक आबादी को सर्वोत्तम नागरिक सुविधाओं की आपूर्ति करना तथा सबको रोजगार के अवसर प्रदान करते हुए राजधानी में एक शानदार जीवन का अवसर प्रदान करना जरूरी है।”

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दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, परिवहन, सड़क और अस्पताल आदि में काफी निवेश की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार के मुताबिक विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय करों में दिल्ली को अपना वैध हिस्सा पाने का पूरा हक है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नियमानुसार वित्तवर्ष 2020-21 में 8150.00 करोड़ रुपये और वित्तवर्ष 2021-22 में 8555.00 करोड़ रुपये का आवंटन दिल्ली के लिए किया जाना चाहिए।

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