दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर लॉकडाउन लागू करने का निर्देश देने से किया इनकार 

नई दिल्ली:दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को लॉकडाउन फिर से बढ़ाने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार को निर्देश देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया।इन याचिकाओं में कोविड-19 के बढ़ते खतरे को देखते हुए दिल्ली वासियों को संक्रमण से बचाने के लिए लॉकडाउन को फिर से सख्ती के साथ लागू करने की मांग की गई थी। एक याचिका में दिल्ली के सभी बॉर्डरों को भी बंद करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।न्यायमूर्ति डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि पीठ याचिकाओं के आधार पर कोई नोटिस जारी नहीं करेगी, इसलिए याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं को वापस ले लिया। लॉकडाउन को फिर से लागू करने के लिए हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें एक याचिका वकील अनिर्बान मंडल की ओर से दायर की गई थी। याची की ओर से वकील मृदुल चक्रवर्ती ने दलील दी थी कि मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा है कि लॉकडाउन को फिर से क्यों लागू नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा वकील ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की एक पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की कि दिल्ली तेजी से कोरोना कैपिटल बनने की ओर अग्रसर हो रही है। इसके साथ ही वकील ने दिल्ली में लॉकडाउन को फिर से सख्ती से एक निश्चित समय के लिए लागू करने की मांग की थी।दूसरी याचिका वकील अंकित वर्मा की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए दिल्ली में 30 जून तक लॉकडाउन को फिर से सख्ती के साथ लागू करने की मांग की थी। इस याचिका में दिल्ली के सभी बॉर्डरों को भी बंद करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉकडाउन-5 के बीच अनलॉक-1 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए याची पर 20 हजार का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि अनलॉक-1 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है और यह ऐसा निर्णय नहीं है, जिसे जल्दबाजी में लागू किया गया हो।न्यायमूर्ति हिमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह फैसला इस आधार पर लिया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से कोई प्रभावित भी न हो और लॉकडाउन के कारण काम के अभाव में कोई भुखमरी का शिकार न हो।

पीठ ने कहा कि यह याचिका बिना किसी ठोस आधार के गलत तरीके से सिर्फ पब्लिसिटी बटोरने के मकसद से दायर की गई है। इस बीच पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह इस स्थिति पर संज्ञान रखे और इसका बारीकी से मूल्यांकन करे। यदि यह पाया जाए कि संक्रमण की दर बढ़ रही है, तो वे हमेशा अपने निर्णय की समीक्षा कर सकते हैं और उन पर अंकुश लगा सकते हैं। यह याचिका एक लॉ स्टूडेंट की ओर से दायर की गई थी।याचिका में याची ने दावा किया था कि केंद्र सरकार द्वारा अनलॉक-1 का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है, जिसके बाद से कोरोना संक्रमण के मामलों में और तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद से दिल्ली में कोरोना के कंटेनमेंट जोन की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

 

Related Articles