दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, ‘सीबीएसई सर्टिफिकेट में नाम बदलाव का बदले नियम’

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नई दिल्ली। अकसर स्कूल सर्टिफिकेट में नाम गलत हो जाने से लोग परेशान हो जाते हैं। इस परेशानी को अब दिल्ली हाई कोर्ट ने भी गंभीर माना है। गलत नाम की परेशानी को दूर करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह नाम में बदलाव से जुड़े अपने बाय लॉ पर दोबारा विचार कर उसे सरल बनाए। इस काम को पूरा करने के लिए कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड को 6 महीनों का वक्त दिया गया है।

सीबीएसई बोर्ड

जस्टिस रविंद्र भट और जस्टिस ए.के. चावला की बेंच ने कहा, ‘भारत एक बड़ा देश है। इनसे अफीलिएटिड स्कूलों में आने वाले सभी विद्यार्थी ऐसे परिवारों से ताल्लुक नहीं रखते हैं जिनके माता-पिता अभी पूरी तरह जागरूक और शिक्षित हों। ज्यादातर बच्चे अपनी इच्छा के अनुशार सीबीएसई स्कूलों में दाखिला लेते हैं, संभव है कि वे अपना नाम भी ठीक से लिखना नहीं जानते हों। जब तक स्टूडेंट को अपनी गलती समझ आती है, तब तक देर हो चुकी होती है।’

सीबीएसई कानूनों पर गौर करते हुए बेंच ने आगे कहा कि बाय लॉ की वजह से स्टूडेंट्स को परेशानी होती है, क्योंकि उनके दूसरे डाक्यूमेंट्स में भी गलत नाम आ जाता है। नाम में गड़बड़ी के कारण कभी कभी बच्चे अच्छे-अच्छे अवसरों से भी हाथ धो बैठते हैं। यह सब बाय लॉ 69.1(i) की वजह से है। एक नाबालिग बच्चे ने अपने पिता के जरिए अपील दायर की थी। माइग्रेशन सर्टिफिकेट में बच्चे के नाम में सुधार की मांग की गई थी। बच्चा गल्फ कंट्री के सीबीएसई स्कूल से केरल के सीबीएसई स्कूल में ट्रांसफर हो रहा था। सीबीएसई ने मांग ठुकरा दी थी और उसे बाय लॉ 69.1 (i) के खिलाफ बताया था।

कोर्ट ने की एक स्टूडेंट की अपील मंजूर- एक स्टूडेंट ने 10वीं क्लास की मार्कशीट में अपने और अपने माता-पिता के नाम में सुधार की मांग की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने स्टूडेंट की अपील मंजूर कर ली और सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह इस स्टूडेंट को नाम में सुधार के साथ नई मार्कशीट जारी करे।

जस्टिस रविंद्र भट और जस्टिस ए. के. चावला की बेंच ने सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता और उसके पैंरंट के नामों में सुधार के साथ संशोधित ग्रेड शीट जारी करे। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की सिर्फ यही मांग है कि सर्टिफिकेट में उनके नाम पूरे लिखे जाएं। बेंच ने कहा, स्कूल रेकॉर्ड और मार्कशीट में ये सुधार हमारी नजर में किसी भी वजह से नाम में बदलाव नहीं माना जा सकता। याचिका में सिर्फ नामों में सुधार की मांग है, बदलाव की नहीं।

कोर्ट ने माना कि मौजूदा मामला बायलॉज 69.1(i) के दायरे में है जो नामों में सुधार से डील करता है। कोर्ट ने इस पर भी गौर किया याचिकाकर्ता को सीबीएसई बोर्ड से 12वीं क्लास के एग्जाम देने हैं और जिसके बाद सीबीएसई उसे दूसरी मार्कशीट जारी करेगा। स्टूडेंट ने सिंगल बेंच के 6 सितंबर 2017 के आदेश के खिलाफ यह अपील दायर की थी। बेंच ने याचिकाकर्ता की सीबीएसई के रेकॉर्ड में 10वीं क्लास ग्रेड शीट में नामों में सुधार की मांग खारिज कर दी थी।

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