सरकार से ठोस प्रस्ताव की मांग, जल्द समाधान की उम्मीद कम

सरकार की दोबारा बातचीत पर पहल के बाबजूद किसान संगठनों की ओर से कोई साकारात्मक जवाब नहीं आया है।

नई दिल्ली : कृषि सुधार कानूनों की समस्या का सामाधान की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। सरकार की दोबारा बातचीत पर पहल के बावजूद किसान संगठनों की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है।

सरकार के पत्र का जवाब तैयार करने और अपने आंदोलन की अगली रणनीति बनाने के लिए किसान यूनियनों के संयुक्त मोर्चा की मंगलवार को बैठक बुलाई गई है। किसान आंदोलन की जल्द सामाधान की फिलहाल उम्मीद नहीं है। दिल्ली बार्डर पर भरी संख्या में किसान कड़ाके के ठंड मे सरकार की मुसीबतें बढ़ा दी हैं।

प्रस्ताव को वही पुराना कह कर टाला

किसान यूनियनों के पास प्रस्ताव को लेकर नेताओं ने ‘वही पुराना’ कहकर टाल दिया। किसानों का कहना है कि सरकार कोई ठोस प्रस्ताव लेकर आए। जिसे सरकार सही साबित करने को लगी है। संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा है कि कानूनों के प्रस्ताव पर एक एक करके विचार किया जाये। कृषि सुधार कानूनों को लेकर चल रहे किसानों का आंदोलन का फिलहाल हल निकलता नहीं दिख रहा है। रविवार की रात सरकार  की ओर से बातचीत के लिए भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर किसानों ने सोमवार से क्रमिक अनशन शुरु कर दियाा।

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