डीजीपी बनने के लिए सीनियरटी नहीं, ‘सेटिंग’ भी जरूरी

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लखनऊ। जावीद अहमद हों या जगमोहन यादव या और भी। आईपीएस की वरिष्‍ठता क्रम में कोई भी फिट नहीं बैठा लेकिन यूपी सरकार की पसंद थे। कई अफसरों को सुपरशीड कर इनको डीजीपी का ताज पहना दिया गया। सिर्फ सपा सरकार नहीं मायावती की सरकार में डीजीपी की पोस्टिंग में ऐसा ही खेल होता आया है। वरिष्‍ठता की बात करें तो कई ऐसे आईपीएस अफसर हैं जो डीजीपी की कुर्सी पाने से पहले ही रिटायर हो गए हैं। या यूं कहें की सत्‍ता तक उनकी पहुंच नहीं थी। उनके कनिष्‍ठ शान से डीजीपी की कुर्सी पर आसीन रहे।
15 आर्इपीएस को सुपरशीड कर जावीद बने आठवें  डीजीपी
तत्‍कालिक डीजीपी जगमोहन यादव को भी प्रदेश सरकार ने सुपरशीड कर डीजीपी बनाया। उनसे पहले आठ आईपीएस अफसर वरिष्‍ठता में ऊपर थे। अब जा‍वीद अहमद नए डीजीपी बनाए गए हैं। वरिष्‍ठता क्रम में 15 आईपीएस अफसरों के बाद आते हैं। 16 वें नंबर पर आने वाले 1984 बैच के आईपीएस जावीद अहमद को डीजीपी बना दिया गया क्‍योंकि यूपी सरकार की पसंद हैं।

वरिष्‍ठता क्रम में देखें तो सबसे ऊपर रंजन  थे

डीजीपी की दौड़ में वरिष्‍ठता के आधार पहला नाम 1979 बैच के और वर्तमान में वरिष्ठम् आईपीएस अधिकारी रंजन द्विवेदी का आता है। 1980 बैच के डीजी प्रशिक्षण सुलखान सिंह का कार्यकाल सितंबर 2017 तक है। 1981 बैच के मलय कुमार सिन्हा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, जबकि इसी बैच के डीजी नागरिक सुरक्षा कमलेन्द्र प्रसाद संकल्प दंपती आत्महत्या प्रकरण से विवादों में हैं। 1981 बैच के ही डीजी पीटीएस विजय सिंह पर बसपा के करीबी होने का ठप्पा है। 1982 बैच के डीजी पुलिस आवास निगम और पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड संभाल रहे विजय कुमार गुप्ता का नाम है।
1982 बैच के डीजी अग्निशमन प्रवीण सिंह भी निर्विवाद छवि के हैं। 1982 बैच के डीजी टेलीकाम डॉ. सूर्य कुमार, 1983 बैच के ओपी सिंह और आरआर भटनागर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके अलावा राम नारायण सिंह, गोपाल गुप्‍ता और डॉ हरीशचंद्र। 1983 बैच के जगमोहन यादव जो अभी डीजीपी के पद से रिटायर हुए हैं। जावीद अहमद 1984 बैच के आईपीएस हैं। इसी बैच के सीनियर सुबेश कुमार और सुतापा सान्‍याल हैं।
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