Dhanteras 2020 : भगवान धन्वन्तरी की पूजा का ये है शुभ मुहूर्त, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि का प्रकटोत्सव धनतेरस के रूप में मनाया जाता है. पुराणों में धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार भी माना गया है.

लखनऊ: आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदिशी तिथि है. ये शुभ तिथि भगवान धन्वन्तरी की पूजन का विशेष दिन है. भगवान धन्वन्तरी के पूजन से मान्यता है कि मनुष्य को निरोगी जीवन मिलता है. ये तिथि आज अंग्रेजी केलिन्डर के अनुसार 12 नवम्बर को पड़ रही है. भगवान् धन्वन्तरी के प्रकट होने की कथा का सार कुछ यूँ बताया जाता है. जब देवताओं व दैत्यों ने समुद्र मंथन किया तो उसमें से कई रत्न निकले. समुद्र मंथन के अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए. उस दिन की तिथि वही थी जो आज है. कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी. इसलिए तब से इस तिथि को भगवान धन्वंतरि का प्रकटोत्सव धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा. पुराणों में धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार भी माना गया है.

इस विधि से करें भगवान धन्वंतरि का पूजन

सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्रों को धारण करें. भगवान धन्वंतरि की मूर्ति को पूजा स्थल या स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें. पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठ जाएं.

उसके बाद भगवान धन्वंतरि की स्तुति इस मंत्र से प्रारंभ करें-

 

सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं, अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य। गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।

मंत्रौच्चारण के बाद भगवान धन्वन्तरी की पूजन विधि –

मंत्रौच्चारण के बाद पूजन स्थल पर आसन देने की भावना से अक्षत चढ़ाएं. आचमन के लिए जल छोड़ें. भगवान धन्वंतरि के चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं. चांदी के बर्तन में खीर का भोग लगाएं/ (अगर चांदी का बर्तन न हो तो अन्य किसी बर्तन में भी भोग लगा सकते हैं।) – इसके बाद पुन: आचमन के लिए जल छोड़ें. मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं. भगवान धन्वंतरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें. शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी भगवान धन्वंतरि को अर्पित करें.

रोग नाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें-

ऊं रं रूद्र रोग नाशाय धनवंतर्ये फट्।। इसके बाद भगवान धन्वंतरि को श्रीफल व दक्षिणा चढ़ाएं। पूजा के अंत में कर्पूर आरती करें।

शुभ मुहूर्त –

अपराह्न्- 5.59 से 7.19- शुभ (प्रदोष काल)
अपराह्न्- 7.19 से 8.59- अमृत

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