दिग्विजय के बयान पर बढ़ा बवाल, सियासी घमासान के बीच गले की फांस बना ‘हिंदू आतंकवाद’

नई दिल्ली। हिंदू आतंकवाद और संघी आतंकवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा, अब वह तेजी पकड़ता नज़र आ रहा है। आरोप और प्रत्यारोप का घमासान शुरू हो गया है। मामले में काफी नेता ऐसे हैं, जो दिग्विजय के सपोर्ट में बात कर रहे हैं। वहीं कई नेता जो भाजपा और आरएसएस के सामर्थक हैं, वे इसे हिंदू धर्म का अपमान बता रहे हैं।

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हिंदू आतंकवाद

खबरों के मुताबिक़ भाजपा के प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने एक चैनल से बातचीत में दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों लेते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जाने की सलाह दे डाली है।

सिन्हा ने कहा कि दिग्विजय सिंह के पास आरएसएस को आतंकी संगठन कहे जाने का कोई सबूत नहीं है। और अगर है तो उन्हें एनआईए से संपर्क करना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि यदि वह बिना किसी सबूत के आरएसएस को आतंक से जोड़ रहे हैं तो वह हिंदू सभ्यता और संस्कृति का अपमान कर रहे हैं।

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वहीं सिंह का बचाव कर रहे सलमान ने कहा कि सैद्धांतिक रूप ने दिग्विजय सिंह के विचार काफी महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने हमेशा से सभी प्रकार के उग्रवाद को गलत बताया है।

खुर्शीद ने कहा, ‘उन्होंने (दिग्विजय सिंह) अल्पसंख्यक उग्रवाद का विरोध किया है और कहा कि सभी तरह का उग्रवाद खराब है। जो उन्होंने कहा है, उसका सामान्यीकरण करने के बजाय हम सभी को संदर्भ में समझना चाहिए और सोचना चाहिए कि वे एक समुदाय या संगठन के खिलाफ बोल रहे हैं।’

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जितने भी हिंदू धर्म वाले आतंकी पकड़े गए हैं वे सब आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कार्यकर्ता रहे हैं। यही नहीं सिंह ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को आतंकवाद तथा नफरत फैलाने वाला संघ बताया है।

उन्होंने यहां तक कहा कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे भी संघ के सदस्य थे। दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति में एक बार फिर वाक युद्ध शुरू हो गया है।

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सिंह ने कहा कि आज तक जितने भी हिंदू धर्म वाले आतंकवादी पकड़े गए हैं सभी संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। उनकी विचारधारा नफरत फैलाती है यही नफरत हिंसा की ओर ले जाती है जो आतंकवाद फैलता है।

बता दें शनिवार को मध्यप्रदेश के शाजापुर में हुई हिंसा को देखते हुए दिग्विजय सिंह ने ये बाते कहीं। उन्होंने कहा कि हर साल महाराणा प्रताप की जयंती पर कई कार्यक्रम का आयोजन होता रहा है जिसमें हर समुदाय के लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं। लेकिन दंगा फसाद कभी नहीं फैला यह सब भाजपा और संघ की सोची समझी राजनीति का हिस्सा है। क्योंकि भाजपा समझने लगी है कि वह आगामी चुनाव हारने वाली है। जब भाजपा को ऐसा लगता है कि वह हार रही है तब वह उस राज्य में हिंसा का सहारा लेती है और धर्म के नाम पर समाज को दो भागों में बांटती है।

बता दें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को आतंक से जोड़ा जाना कोई नई बात नहीं है। पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की हत्या के पीछे आरएसएस का हाथ बताया था, इस मामले में पिछले दिनों राहुल की पेशी नागपुर कोर्ट में भी हुई थी। जहां राहुल ने खुद को निर्दोष बताया था।

अभी आरएसएस और राहुल का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरएसएस को लेकर विवादित बयान दिया है।

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