इस दीवाली न जलाएं पटाखें, नहीं तो हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

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दीवाली में पटाखों की रौनक ना देखने को मिलें ऐसा हो ही नहीं सकता। जिस तरह दिवाली पर पूजा करना और दिए जलाना हमारी परंपरा है, उसी तरह पटाखें जलाना भी त्‍योहारों पर जरूरी हो गया है। लेकिन पटाखें जलाए बिना लोगों की दीवाली कंपलीट नहीं होती। अगर पटाखें हमारे स्वास्थ्य को नुकसान व पर्यावरण को हानि पहुंचा रहे हैं तो हमें इनके इस्तेमाल के बारे में सही से सोचने की जरूरत है।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हाल के फैसले में दीवाली के दिन पटाखों का प्रयोग करने की इजाजत रात 8 से 10 बजे के बीच दे दी। दरअसल, पटाखों में मौजूद छोटे-छोटे कण सेहत पर तो बुरा असर डालते ही हैं लेकिन साथ ही इससे फेफड़ों में सूजन भी आ जाती है। इससे वह अपना काम ठीक से नहीं कर पाते, जिससे ऑर्गेन फेलियर और मौत का खतरा बढ़ जाता है। पटाखों के धुएं में मौजूद विषाक्त कणों के फेफड़ों तक पहुंचने से अस्थमा या दमा का अटैक आ सकता है। ऐसे में जिन लोगों को सांस की समस्याएं हों, उन्हें अपने आप की प्रदूषित हवा से सावधान रहना चाहिए और खुद भी पटाखे नहीं जलाने चाहिए।

  1. हार्टअटैक का भी खतरा.
    दरअसल, पटाखों के धुएं से हार्टअटैक और स्ट्रोक का खतरा भी पैदा हो सकता है। पटाखों में मौजूद लैड सेहत के लिए खतरनाक है, इसके कारण हार्टअटैक और स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। जब पटाखों से निकलने वाला धुंआ सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। दिमाग को पर्याप्त मात्रा में खून न पहुंचने के कारण व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो सकता है।
  1. गर्भवती महिलाएं भी रहें दूर
    बच्चे और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहना चाहिए। जहां पटाखों से निकला धुआं छोटे बच्चों में सांस की समस्याएं पैदा कर सकता है। इससे गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी ऐसे समय में घर पर ही रहना चाहिए।
  1. कैंसर का भी खतरा
    पटाखे को रंग-बिरंगा बनाने के लिए रेडियोएक्टिव और जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। ये पदार्थ धुएं में मिलकर सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।
  1. हाई ब्लड प्रेशर का कारण
    दीवाली में पटाखों का धुआं और शोर, अवसाद, हाई ब्लड प्रेशर, सुनने में परेशानी, कमजोर याददाश्त, अनिद्रा आदि का कारण भी बन सकता है। दरअसल, पटाखों का हानिकारक धुआं और शोर दिल व दिमाग के लिए अच्छी नहीं है इसलिए इससे इन सभी बीमारियों का खतरा 10 गुणा बढ़ जाता है।
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