पुराणों की इन बातों को जानकर ही करें शादी, नहीं तो पड़ेगा पछताना

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हर लड़की का अपनी शादी को लेकर कुछ सपने होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है वेदों और पुराणों में शादी को लेकर क्या अवधारणा दी जाती है। जी हां, ये बात आपको जरा अटपटी जरुर लगेगी, लेकिन हिंदू पुराणों में पुरुषों के लिए विवाह के कुछ नियम बताए गए हैं तो लड़कियों के लिए भी। आइए जानते हैं कि शादी से पहले किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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विष्णु पुराणों में शादी के नियम के विषय में बताया गया है कि गंभीर रूप से बीमार इंशान से शादी नहीं करना चाहिए। व्यक्ति धनी हो लेकिन अस्वस्थ हो तो नाता नहीं जोड़ना चाहिए।

शिक्षा ग्रहण करने वाले इंशान से शादी नहीं करना चाहिए। जब व्यक्ति शिक्षा ग्रहण करके जीवन यापन के लिए धन कमाने योग्य हो जाए तभी विवाह करना चाहिए। इस बात का जिक्र लगभग सभी पुराणों में किसी ना किसी रूप में हुआ है क्योंकि शिक्षा ग्रहण करने तक व्यक्ति को ब्रह्मचर्य आश्रम में रहने की सलाह दी गई है।

शादी

देवी भागवत पुराणों में कहा गया है कि जिस मनुष्य में संगीत कला के प्रति रुचि नहीं हो, जिसके मन में संगीत से हलचल न हो, जिसे सुरों की समझ नहीं हो उससे नाता रखने पर सुख नहीं मिल सकता है। देवी भागवत पुराण में राजकुमारी दमयंती ऐसा इसलिए कहती हैं क्योंकि संगीत से विहीन मनुष्य पत्थर की तरह हो जाता है और ऐसे मनुष्य के साथ जीवन गुजारना कठिन होता है।

अपने पर अहंकार करनेवाले से नाता नहीं जोड़ना चाहिए। गुणवान इंशान अगर सामान्य आयवाला ही क्यों ना हो उससे नाता जोड़ना अंत में सुखदायक होता है।

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