भूलकर भी न सोएं इस दिशा में, नहीं तो हो जाएगी आपकी मौत

हिंदू धर्म के लोग वास्तुशास्त्र को बहुत ही ज्यादा महत्व देते हैं। क्योंकि वास्तुशास्त्र में दिशाओं से संबंधित बहुत सारी जानकारी प्राप्त होती है। शास्त्र में दिशाओं को बहुत महत्व दिया जाता है। जैसे- किस दिशा में बैठकर ऑफिस का काम करना चाहिए। बच्चों को पढ़ाई करने के लिए कौन सी दिशा सबसे अच्छी है। किस दिशा में सिर रखकर नहीं सोना चाहिए, इन सभी बातों की जानकारी वास्तुशास्त्र हमें बताता है। साथ ही इससे जीवन में बहुत सारी परेशानियों से निजात भी पाया जा सकता है।

इस दिशा में सोने से खुलता है मौत का दरवाजा के लिए इमेज परिणाम

शयन कक्ष को वास्तु अनुकुल बना कर दिशाओं का सहयोग लेने से नींद की गोलियों, डिप्रेशन, कार्य की व्यस्तता, चिंताओं के बोझ आदि से बचा जा सकता है। तो आइए जानते हैं किस दिशा में सिर करके सोने से खुलता मौत का दरवाजा।

वास्तुशास्त्र के अनुसार कहा गया है कि दक्षिण दिशा की ओर पैर और उत्तर दिशा की ओर सिर रख कर नहीं सोना चाहिए। दक्षिण दिशा में यमलोक है। इस दिशा में सोने से खुलता है मौत का दरवाजा। दक्षिण दिशा की और पैर करके सोना या मुख करके बैठना शरीर के लिए हानिकारक है। अपने निवास का मुख्य द्वार कभी भी दक्षिण की ओर नहीं रखना चाहिए। विशेष रूप में वीरवार के दिन दक्षिण दिशा हानिकारक होती है। वीरवार की प्रधानता के कारण उस दिन पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और प्रबल हो जाता है।

वास्तुशास्त्र

पृथ्वी गुरुत्वाकर्षण पर टिकी है। अपनी धुरी पर घूम रही है। इसकी धुरी के उत्तर-दक्षिण दो छोर हैं। यह चुंबकीय क्षेत्र हैं। अतएव मनुष्य जब दक्षिण की ओर पैर करता है तो वह पृथ्वी की धुरी के समानांतर हो जाता है। इस प्रकार धुरी के चुंबकीय प्रभाव से उसका रक्तप्रवाह प्रभावित होता है। सिरदर्द, हाथ-पैर की ऐंठन, कमरदर्द, शरीर का कांपना जैसा दोष आता जाता है, दक्षिण दिशा फेफड़ों की गति अत्यंत मंद करती है। इसी कारण मृत व्यक्ति के पैर दक्षिण दिशा की ओर कर दिए जाते हैं ताकि उसके शरीर का रहा-सहा जीवांश भी समाप्त हो जा

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