रामेश्वरम के इन मंदिरों की है एक अलग कहानी, जरुर करिए यहां के दर्शन

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रामेश्वरम। रामेश्वरम हिन्दुओं के लिए पवित्र और तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां मौजूद हर मंदिर अपनी एक अलग कहानी सुनाता है। यहां आने पर पर्यटक एक शांत वातावरण को महसूस करते हैं। रामेश्वरम तमिल नाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। अगर आप अपने परिजनों के साथ एक तीर्थयात्रा पर जाने का विचार बना रहे हैं तो एक बार रामेश्वरम जरुर जाएं। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। आइये आज हम आपको बताते हैं कि जब आप रामेश्वरम जाएं तो कौन-कौन से मंदिर जरुर जाएं।

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देवी मंदिर

रामेश्वर के मंदिर में जिस प्रकार शिवजी की दो मूर्तियां है, उसी प्रकार देवी पार्वती की भी मूर्तियां अलग-अलग स्थापित की गई है। देवी की एक मूर्ति पर्वतवर्द्धिनी कहलाती है, दूसरी विशालाक्षी। मंदिर के पूर्व द्वार के बाहर हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति अलग मंदिर में स्थापित है।

सेतु माधव

रामेश्वरम का मंदिर है तो शिवजी का, लेकिन उसके अंदर कई अन्य मंदिर भी है। सेतुमाधव का कहलाने वाले भगवान विष्णु का मंदिर इनमें प्रमुख है।

बाइस कुण्ड

रामनाथ के मंदिर के अंदर और परिसर में अनेक पवित्र तीर्थ है। इनमें प्रधान तीर्थो (जल कुण्ड) की संख्या चौबीस थी, मगर दो कुंड सूख गए हैं और अब बाइस ही बचे हैं। ये वास्तव में मीठे जल के अलग-अलग कुंए है। यहां ‘कोटि तीर्थ’ जैसे एक दो तालाब भी है। इन तीर्थों में स्नान करना बड़ा फलदायक और पाप-निवारक समझा जाता है। वैज्ञानिक का कहना है कि इन तीर्थो में अलग-अलग धातुएं मिली हुई है। इस कारण उनमें नहाने से शरीर के रोग दूर हो जाते है और नई ताकत आ जाती है। बाईसवें कुण्ड में पहले 21 का मिला-जुला जल आता है।

विल्लीरणि तीर्थ

रामेश्वरम के मंदिर के बाहर भी दूर-दूर तक कई तीर्थ है। हर तीर्थ के बारें में अलग-अलग कथाएं है। यहां से करीब तीन मील पूर्व में एक गांव है, जिसका नाम तंगचिमडम है। यह गांव रेल मार्ग के किनारे बसा है। वहां स्टेशन के पास समुद्र में एक तीर्थकुंड है, जो विल्लूरणि तीर्थ कहलाता है। यहां समुद्र के खारे पानी बीच में से मीठा जल निकलता है, यह बड़े ही अचंभे की बात है। कहा जाता है कि एक बार सीता जी को बड़ी प्यास लगी। पास में समुद्र को छोड़कर और कहीं पानी न था, इसलिए राम ने अपने धनुष की नोक से यह कुंड खोदा था।

एकांत राम

तंगचिडम स्टेशन के पास एक जीर्ण मंदिर है। उसे ‘एकांत’ राम का मंदिर कहते है। इस मंदिर के अब जीर्ण-शीर्ण अवशेष ही बाकी हैं। रामनवमी के पर्व पर यहां कुछ रौनक रहती है। बाकी दिनों में बिलकुल सूना रहता है। मंदिर के अंदर श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान और सीता की बहुत ही सुंदर मूर्तिया है।

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धुर्नधारी राम की एक मूर्ति ऐसी बनाई गई है, मानो वह हाथ मिलाते हुए कोई गंभीर बात कर रहे हो। दूसरी मूर्ति में राम सीताजी की ओर देखकर मंद मुस्कान के साथ कुछ कह रहे है। ये दोनों मूर्तियां बड़ी मनोरम है। यहां सागर में लहरें बिल्कुल नहीं आतीं, इसलिए एकदम शांत रहता है। शायद इसीलिए इस स्थान का नाम एकांत राम है।

कोद्ण्ड स्वामी मंदिर

रामेश्वरम के टापू के दक्षिण भाग में, समुद्र के किनारे एक और दर्शनीय मंदिर है। यह मंदिर रमानाथ मंदिर से पांच मील दूर पर बना है। यह कोदंड ‘स्वामी का मंदिर’ कहलाता है। कहा जाता है कि विभीषण ने यहीं पर राम की शरण ली थी। रावण-वध के बाद राम ने इसी स्थान पर विभीषण का राजतिलक कराया था। इस मंदिर में राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां देखने योग्य है। विभीषण की भी मूर्ति यहां अलग स्थापित है।

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